राज्यसभा का सियासी पहेली: क्या शरद पवार गठबंधन की जीत की एकमात्र चाबी हैं?
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संवाद 24 मुंबई। महाराष्ट्र राजनीति में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा-विधान परिषद चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बेहद पेचीदा हो गए हैं। इस बार 7 राज्यसभा सीटें रिक्त हो रही हैं और महायुति (एनडीए) के पास अकसर 6 सीटें जीतने की स्थिति है, लेकिन विपक्षी महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के लिए सिर्फ एक सीट पर दांव लगाने का मौका बचा है — और वो भी गहन राजनीतिक परामर्श के बाद।
गठबंधन के अंदर तनाव
एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) शामिल हैं, लेकिन इस बार उम्मीदवार तय करना आसान नहीं है। कांग्रेस चाहती है कि या तो वो राज्यसभा में एक सीट पाये या फिर विधान परिषद में अपनी मांग पूरी हो, जिससे उनकी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत रहे। दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) का दावा है कि विधायकों की संख्या के हिसाब से राज्यसभा सीट उन्हीं का हक है, और आगे की बातचीत पर निर्णय होना है।
क्या शरद पवार होंगे वो उम्मीदवार?
राष्ट्रीय छात्र नेता और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार के नाम पर सियासी चर्चाएँ बेहद तेज़ हैं। उनका कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है और यदि वे खुद चुनाव लड़ते हैं तो वह विपक्ष को एकजुट कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास अनुभवी नेतृत्व के कारण सभी घटक दलों को साथ लाने की क्षमता है। लेकिन उन्होंने अभी तक आधिकारिक निर्णय नहीं लिया है — और यही वजह है कि विपक्षी दल इस पर सावधानी से विचार कर रहे हैं।
संख्या बल का खेल
महाराष्ट्र विधानसभा में वर्तमान में कांग्रेस के 16, शिवसेना (यूबीटी) के 20 और एनसीपी (एसपी) के 10 विधायक हैं — कुल 46 वोट, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त हो सकते हैं। इसके बावजूद, यह जरूरी नहीं कि सभी दल एक ही उम्मीदवार के पीछे खड़े हों, क्योंकि पार्टी-स्तर पर हित और रणनीति अलग-अलग चल रहे हैं।
कांग्रेस की दुविधा
कांग्रेस खास तौर पर चाहती है कि उसे या तो राज्यसभा की एक सीट मिले या फिर विधान परिषद में उसके लिए सीट सुनिश्चित हो। अगर उसे राज्यसभा में जगह मिलती है तो शिवसेना (यूबीटी) या एनसीपी उसमें हिस्सेदारी मानने को तैयार हैं; लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
शिवसेना (यूबीटी) की मर्ज़ी
शिवसेना (यूबीटी) नेताओं ने भी जोर देकर कहा है कि उनकी पार्टी को उस सीट पर प्राथमिक अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि उनके विधानसभा में संख्या बल अधिक है। इस दावे ने गठबंधन के अंदर एक हल्की खींचतान पैदा कर दी है, जिसकी वजह से सहयोगी दलों के लिए एक साझा उम्मीदवार चुनना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
चुनाव की तिथि और प्रक्रिया
राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है, और 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, जबकि मतदान 16 मार्च को होना तय है। मतदाता वे विधायक हैं जो विधानसभा का मताधिकार रखते हैं, और यह चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है — यानी विधायक वोट करते हैं और उम्मीदवार को जीत के लिए विशेष वोट गणित पूरा करना होता है।
सियासी रणनीतियाँ
राज्यसभा चुनाव सिर्फ सीट जीतने का मामला नहीं है — यह असल में राजनीतिक रणनीति, गठबंधन की मजबूती और भविष्य की चुनावी योजनाओं का परीक्षण भी है। महाविकास आघाड़ी चाहता है कि मौजूदा समीकरणों के बीच एक साझा उम्मीदवार के ज़रिये सबका समर्थन हासिल हो, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है।






