सियासत का ‘इजरायल’ कनेक्शन: राहुल गांधी के तंज पर भाजपा का जोरदार पलटवार, विदेश नीति पर छिड़ा नया घमासान
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत की राजनीति में इन दिनों विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय दौरे चर्चा के केंद्र में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा को लेकर देश के भीतर राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री की इस यात्रा और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर भारत के रुख को लेकर किए गए तंज ने एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी खेमे की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी पूरी आक्रामकता के साथ पलटवार किया है, जिससे यह मुद्दा अब केवल कूटनीति तक सीमित न रहकर शुद्ध राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया है।
राहुल गांधी का तीखा प्रहार और कूटनीतिक सवाल
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा के समय और भारत की विदेश नीति के संतुलन पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी का तर्क है कि जब मध्य-पूर्व में मानवीय संकट गहरा रहा है, तब भारत की प्राथमिकताएं स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार की वर्तमान नीतियां भारत की पारंपरिक ‘तटस्थता’ की छवि को प्रभावित कर रही हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि प्रधानमंत्री का झुकाव एक तरफ अधिक दिख रहा है, जो भविष्य में भारत के रणनीतिक हितों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भाजपा का कड़ा जवाब: ‘विपक्ष को देश की उपलब्धि पर गर्व नहीं’
राहुल गांधी के इन बयानों पर भाजपा ने जबरदस्त जवाबी हमला किया है। भाजपा प्रवक्ताओं और वरिष्ठ मंत्रियों का कहना है कि कांग्रेस नेता वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख को पचा नहीं पा रहे हैं। भाजपा का तर्क है कि प्रधानमंत्री मोदी ने वह कर दिखाया है जो पिछली सरकारों के लिए असंभव था—इजरायल और अरब जगत दोनों के साथ एक साथ मजबूत संबंध बनाना। भाजपा ने राहुल गांधी के तंज को ‘अपरिपक्व राजनीति’ करार देते हुए कहा कि विपक्ष अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी देश को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहा है।
विदेश नीति पर राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम राजनीतिक नैरेटिव
इस पूरे विवाद के केंद्र में भारत की ‘डी-हाइफनेशन’ नीति है। भाजपा सरकार का दावा है कि भारत अब किसी भी देश के दबाव में अपनी विदेश नीति तय नहीं करता। जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री इजरायल के साथ रक्षा और प्रौद्योगिकी में साझेदारी बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत ने मानवीय सहायता के मामले में फिलिस्तीन का साथ भी नहीं छोड़ा है। भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवाल केवल अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण की राजनीति से प्रेरित हैं, जबकि सरकार ‘इंडिया फर्स्ट’ (India First) की नीति पर चल रही है।
इजरायल यात्रा का रणनीतिक महत्व
राजनीतिक बयानबाजी से इतर, विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, साइबर सुरक्षा, और कृषि तकनीक में इजरायल भारत का एक अनिवार्य भागीदार बनकर उभरा है। भाजपा इसी ‘विकास और सुरक्षा’ के एजेंडे को जनता के सामने रख रही है। भाजपा का मानना है कि प्रधानमंत्री को इजरायल की संसद में मिलना सम्मान पूरे देश का सम्मान है, जिसे विपक्ष को राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए।
विपक्ष की घेराबंदी और भविष्य की चुनौती
राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष यह नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहा है कि सरकार घरेलू समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए अंतरराष्ट्रीय दौरों का सहारा ले रही है। कांग्रेस का कहना है कि वे भारत-इजरायल संबंधों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भारत को अपनी उस ऐतिहासिक भूमिका को नहीं भूलना चाहिए जहाँ वह दुनिया के दबे-कुचले लोगों की आवाज बनता था। विपक्ष द्वारा उठाए गए इन सवालों ने संसद से लेकर सोशल मीडिया तक एक वैचारिक युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है।
कूटनीति में उलझी घरेलू राजनीति
जैसे-जैसे चुनाव और महत्वपूर्ण राजनीतिक पड़ाव करीब आ रहे हैं, विदेश नीति घरेलू राजनीति का एक अनिवार्य हिस्सा बनती जा रही है। राहुल गांधी के तंज और भाजपा के पलटवार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में कूटनीति केवल सरकारी गलियारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जनता के बीच भी इस पर गहन मंथन होगा।






