झारखंड नगर निकाय चुनाव: थम गया प्रचार का शोर, अब ‘जनता की अदालत’ में उम्मीदवारों की किस्मत; 23 फरवरी को होगा महासंग्राम!
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संवाद 24 झारखंड। नगर निकाय चुनावों के लिए पिछले कई दिनों से जारी धुआंधार चुनाव प्रचार का शोर आज शाम पूरी तरह थम गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पहले लाउडस्पीकर, रैलियां और जनसभाएं प्रतिबंधित कर दी गई हैं। अब बारी मतदाताओं की है, जो 23 फरवरी को अपने मताधिकार का प्रयोग कर शहर की नई सरकार चुनेंगे। इस चुनाव को राज्य की सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच ‘लिटमस टेस्ट’ माना जा रहा है, क्योंकि इसके नतीजे आगामी राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
प्रचार के आखिरी दिन दिग्गजों ने झोंकी ताकत
प्रचार के अंतिम दिन सभी राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। रांची, धनबाद, जमशेदपुर और अन्य निकायों में उम्मीदवारों ने घर-घर जाकर जनसंपर्क किया। नुक्कड़ नाटकों और रोड शो के जरिए मतदाताओं को लुभाने की आखिरी कोशिश की गई। सत्ता पक्ष ने जहां विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यों को अपना मुख्य मुद्दा बनाया, वहीं विपक्ष ने भ्रष्टाचार, साफ-सफाई की बदहाली और नागरिक सुविधाओं के अभाव को लेकर सरकार को घेरा।
23 फरवरी को मतदान: सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
राज्य निर्वाचन आयोग ने 23 फरवरी को होने वाले मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए मतदान केंद्रों की निगरानी की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की गड़बड़ी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मतदाता अपने पार्षदों और मेयर/अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के लिए वोट डाल सकेंगे।
नगर निकायों का गणित और जनता की उम्मीदें
झारखंड के इस निकाय चुनाव में कई दिग्गजों की साख दांव पर लगी है। शहरी क्षेत्रों में जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, पक्की सड़कें और कचरा प्रबंधन जैसे बुनियादी मुद्दे छाए हुए हैं। युवा मतदाताओं में इस बार काफी उत्साह देखा जा रहा है, जो रोजगार और बेहतर शहरी बुनियादी ढांचे की उम्मीद में वोट करेंगे। राजधानी रांची में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार दिख रहे हैं, जहाँ भाजपा, झामुमो-कांग्रेस गठबंधन और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच कड़ी टक्कर है।
शांतिपूर्ण चुनाव के लिए प्रशासन की अपील
जिला निर्वाचन पदाधिकारियों ने आम जनता से शांतिपूर्ण तरीके से और भारी संख्या में मतदान करने की अपील की है। शराब की दुकानों को मतदान संपन्न होने तक बंद रखने का आदेश दिया गया है। साथ ही, चुनाव प्रचार थमने के बाद अब किसी भी बाहरी व्यक्ति (जो उस क्षेत्र का मतदाता नहीं है) को चुनावी क्षेत्र में रुकने की अनुमति नहीं होगी। सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है ताकि कोई भ्रामक खबर या नफरत फैलाने वाला संदेश प्रसारित न हो सके।






