सरहद पार ‘जीत की मिठास’: ममता दीदी ने ‘तारीक भाई’ को भेजे फूल और संदेश
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संवाद 24 नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित ‘डिप्लोमेटिक अंदाज’ से सबको चौंका दिया है। बांग्लादेश में हुए 13वें आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत के बाद, ममता बनर्जी ने पार्टी के चेयरमैन और भावी नेतृत्व के प्रमुख दावेदार तारीक रहमान को फूलों का गुलदस्ता और विशेष मिठाइयां भेजकर बधाई दी है। तारीक रहमान, जिन्हें ममता बनर्जी ने ‘तारीक भाई’ कहकर संबोधित किया, उनके लिए यह उपहार शनिवार शाम को ढाका के गुलशन स्थित पार्टी कार्यालय में पहुंचे।
सोशल मीडिया पर दी बधाई, रमजान की भी दी शुभकामनाएं
सिर्फ उपहार ही नहीं, ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर भी एक बेहद भावुक और गर्मजोशी भरा संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा, “बांग्लादेश के मेरे सभी भाइयों और बहनों को मेरा हार्दिक अभिनंदन और शुभोनंदन। आने वाले पवित्र रमजान महीने की आप सभी को अग्रिम मुबारकबाद। इस महान जीत के लिए मैं अपने ‘तारीक भाई’, उनकी पार्टी और सभी सहयोगी दलों को बधाई देती हूं। मेरी दुआ है कि आप सभी खुश और स्वस्थ रहें।”
क्यों खास है यह ‘मिठास’?
ममता बनर्जी का यह कदम केवल एक बधाई संदेश नहीं, बल्कि पड़ोसी देश के साथ रिश्तों की जमी हुई बर्फ को पिघलाने की एक कोशिश माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में कुछ उतार-चढ़ाव देखे गए थे, विशेष रूप से शेख हसीना सरकार के जाने के बाद। ऐसे में ‘दीदी’ का तारीक रहमान को ‘भाई’ कहना और मिठाइयां भेजना यह संकेत देता है कि पश्चिम बंगाल सरकार पड़ोसी मुल्क के साथ सौहार्दपूर्ण और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की पक्षधर है।
चुनाव परिणामों की तस्वीर
हाल ही में संपन्न हुए इन चुनावों में तारीक रहमान की पार्टी BNP और उसके सहयोगियों ने 297 में से 212 सीटों पर कब्जा जमाकर क्लीन स्वीप किया है। जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 77 सीटें मिली हैं। इस जीत के साथ ही बांग्लादेश में सत्ता का पूरा ढांचा बदल गया है।
क्या कहते हैं जानकार?
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह निजी जुड़ाव आने वाले समय में तीस्ता जल बंटवारे और सीमा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत का रास्ता साफ कर सकता है। जब केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में व्यस्त है, तब ममता बनर्जी ने ‘सॉफ्ट पावर’ का इस्तेमाल कर बंगाल और बांग्लादेश के बीच की सांस्कृतिक डोर को और मजबूत कर दिया है।






