पुलवामा की बरसी: ‘शहादत का दिन शोक नहीं, आतंक के समूल विनाश का संकल्प है’, जब 12 दिनों में भारत ने लिया था लहू का हिसाब

Share your love

संवाद 24 श्रीनगर। आज पूरा देश पुलवामा के उन वीर सपूतों को नमन कर रहा है, जिन्होंने 14 फरवरी 2019 को मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। लेकिन आज का यह दिन केवल आंसू बहाने या शोक मनाने का नहीं है, बल्कि यह उस अजेय साहस और प्रतिशोध की गाथा को याद करने का है, जिसने दुनिया को बता दिया था कि ‘नया भारत’ घर में घुसकर मारना जानता है। पुलवामा हमले की बरसी पर आज देश भर में आयोजित कार्यक्रमों के बीच यह गूँज सुनाई दे रही है कि यह ‘ब्लैक डे’ नहीं, बल्कि आतंकवाद के पूर्ण विनाश का ‘उद्घोष दिवस’ है।

वह काला दिन और बुज़दिलाना हमला
14 फरवरी 2019 की वह दोपहर कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकी ने बारूद से भरी गाड़ी को जवानों की बस से टकरा दिया, जिसमें हमारे 40 जांबाज शहीद हो गए। उस समय पूरे देश में आक्रोश की लहर थी और हर भारतीय की आंखों में सिर्फ एक ही मांग थी—’बदला’।

12 दिनों का वो सफर: जब कांप उठा था पाकिस्तान
पुलवामा हमले के ठीक 12 दिनों के भीतर, भारत ने वह कर दिखाया जिसकी कल्पना सीमा पार बैठे आकाओं ने भी नहीं की थी। 26 फरवरी 2019 की रात को भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने नियंत्रण रेखा (LoC) को पार किया और बालाकोट में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ट्रेनिंग कैंपों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार था जब वायुसेना ने पाकिस्तान की मुख्य सीमा के भीतर घुसकर आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था। यह ऑपरेशन इस बात का प्रमाण था कि भारत की कूटनीति और सैन्य शक्ति अब रक्षात्मक से आक्रामक हो चुकी है।

शहादत से संकल्प तक: आतंकवाद पर अंतिम प्रहार
पुलवामा की इस बरसी पर सुरक्षा विशेषज्ञों और आम नागरिकों का कहना है कि 14 फरवरी अब एक ‘क्लैरियन कॉल’ (Clarion Call) बन चुका है। यह दिन याद दिलाता है कि जब तक आतंक की जड़ें पूरी तरह खत्म नहीं हो जातीं, तब तक चैन से नहीं बैठना है। पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में जो आमूल-चूल परिवर्तन आए हैं, वह इसी संकल्प का परिणाम हैं। धारा 370 के हटने के बाद से पत्थरबाजी की घटनाएं इतिहास बन चुकी हैं और आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ दी गई है।

शहीदों के परिवारों का जज्बा
आज श्रीनगर से लेकर कन्याकुमारी तक शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। शहीदों के परिवारों का कहना है कि उन्हें अपने बेटों के बलिदान पर गर्व है, लेकिन उनकी असली श्रद्धांजलि तब होगी जब देश का झंडा आतंकवाद के ऊपर हमेशा ऊंचा रहेगा। सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद को पालने-पोसने वालों को अब कोई रियायत नहीं दी जाएगी। ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत सुरक्षा बल आज भी घाटी के कोने-कोने में सक्रिय हैं।

बदलते कश्मीर की तस्वीर
श्रीनगर की सड़कों पर आज डर नहीं, बल्कि देशप्रेम का माहौल है। जिस कश्मीर को आतंक की राजधानी बनाने की साजिश रची गई थी, वही कश्मीर आज विकास और पर्यटन के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। पुलवामा की शहादत ने देश को एकजुट किया और उसी एकता की ताकत आज पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा पर भारी पड़ रही है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News