दिल्ली में नए ‘शक्ति केंद्र’ का उदय: पीएम मोदी ने राष्ट्र को सौंपा ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’, अब यहीं से लिखा जाएगा नए भारत का भाग्य
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत की राजधानी दिल्ली के हृदय स्थल यानी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना ने आज एक और मील का पत्थर पार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ और इसके साथ जुड़े ‘कर्तव्य भवन’ का उद्घाटन किया। यह सिर्फ ईंट-पत्थरों से बनी इमारतें नहीं हैं, बल्कि यह उस संकल्प का प्रतीक हैं जो 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में लिया गया है। इस नए परिसर के शुरू होने के साथ ही, अब देश की सर्वोच्च नीतियों और निर्णयों का संचालन इसी आधुनिक और अत्याधुनिक तकनीक से लैस केंद्र से होगा।
अत्याधुनिक तकनीक और विरासत का संगम
‘सेवा तीर्थ’ का निर्माण न केवल सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर किया गया है, बल्कि इसमें भारत की सांस्कृतिक विरासत की झलक भी स्पष्ट दिखाई देती है। परिसर की वास्तुकला में आधुनिकता और भारतीय परंपरा का ऐसा समावेश किया गया है जो दुनिया भर के लिए एक मिसाल बनेगा। नए पीएमओ परिसर में उन्नत संचार प्रणालियाँ, साइबर सुरक्षा के अभेद्य कवच और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कॉन्फ्रेंस रूम बनाए गए हैं। ‘कर्तव्य भवन’ विशेष रूप से उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए समर्पित है जो दिन-रात देश सेवा में जुटे रहते हैं, यहाँ उनके लिए कार्यक्षमता बढ़ाने वाले आधुनिक वर्क-स्टेशन और सुविधाएं प्रदान की गई हैं।
औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का प्रतीक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि नई दिल्ली का यह नया स्वरूप गुलामी की मानसिकता के अंतिम अवशेषों को मिटाने का प्रयास है। जहां पुराने परिसर ब्रिटिश काल की व्यवस्थाओं पर आधारित थे, वहीं ‘सेवा तीर्थ’ पूरी तरह से भारतीय जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि “आज का भारत अपनी विरासत पर गर्व भी करता है और आधुनिकता की दौड़ में सबसे आगे भी रहना चाहता है।” इस उद्घाटन के साथ ही साउथ ब्लॉक से पीएमओ की शिफ्टिंग की प्रक्रिया भी गति पकड़ लेगी, जिससे प्रशासन में अधिक समन्वय और गति आएगी।
पर्यावरण और आत्मनिर्भरता का ध्यान
यह नया परिसर ‘ग्रीन बिल्डिंग’ के सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग, जल संचयन की उन्नत व्यवस्था और कचरे के शून्य प्रबंधन (Zero Waste Management) की तकनीक अपनाई गई है। निर्माण में इस्तेमाल किया गया अधिकांश सामान ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी कंपनियों द्वारा तैयार किया गया है। यह इमारत यह भी दर्शाती है कि कैसे विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चल सकते हैं।
सुरक्षा का अभेद्य किला
नए पीएमओ और कर्तव्य भवन की सुरक्षा व्यवस्था को ‘स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप’ (SPG) और अत्याधुनिक एआई-आधारित निगरानी प्रणालियों से लैस किया गया है। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए यहाँ सुरक्षित संचार गलियारे और बंकर जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं, जो देश के सर्वोच्च नेतृत्व की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस नए परिसर के उद्घाटन से राजपथ (अब कर्तव्य पथ) के आसपास के पूरे क्षेत्र का स्वरूप बदल गया है। यहाँ आम जनता के लिए भी विशेष गैलरी और दर्शनीय स्थल विकसित किए जा रहे हैं, जहाँ लोग यह देख सकेंगे कि देश की नीतियां कैसे बनती हैं। यह परियोजना न केवल दिल्ली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में लगने वाले समय को भी कम करेगी क्योंकि सभी प्रमुख विभाग अब एक-दूसरे के निकट आ जाएंगे। उद्घाटन समारोह के बाद, प्रधानमंत्री ने उन श्रमजीवियों से भी मुलाकात की जिन्होंने इस ऐतिहासिक निर्माण में अपना पसीना बहाया है। उन्होंने श्रमिकों को ‘राष्ट्र निर्माण के नायक’ बताते हुए उनके योगदान की सराहना की। ‘सेवा तीर्थ’ के रूप में देश को अब एक ऐसा केंद्र मिल गया है, जहाँ से जन-कल्याण की योजनाओं को और अधिक गति और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा।






