सावधान! आपकी एक छोटी सी भूल बन सकती है जानलेवा: नोएडा के डॉक्टरों ने दी एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर बड़ी चेतावनी
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संवाद 24 नई दिल्ली । आज के दौर में जब भी हमें हल्का बुखार, जुकाम या शरीर में दर्द महसूस होता है, तो हम अक्सर डॉक्टर के पास जाने के बजाय सीधे मेडिकल स्टोर का रुख करते हैं। बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं (Antibiotics) लेना अब एक आम चलन बन चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह ‘शॉर्टकट’ आपके शरीर को एक ऐसे अंधेरे मोड़ पर ले जा रहा है जहाँ मामूली बीमारियाँ भी लाइलाज हो सकती हैं? नोएडा के प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने हाल ही में एक गंभीर चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों का कहना है कि एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग और बिना सोचे-समझे ‘सेल्फ मेडिकेशन’ (खुद से इलाज करना) न केवल वर्तमान स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर रहा है। इसे चिकित्सा जगत में ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ (AMR) कहा जाता है, जिसका सीधा मतलब है कि बैक्टीरिया इतने ताकतवर हो गए हैं कि उन पर दवाइयों का असर होना बंद हो गया है।
क्यों खतरनाक है खुद से दवा लेना?
नोएडा के जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, लोग अक्सर वायरल इंफेक्शन (जैसे सामान्य फ्लू या सर्दी) होने पर भी एंटीबायोटिक का सेवन शुरू कर देते हैं। हकीकत यह है कि एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों पर काम करती हैं, वायरस पर नहीं। जब आप गलत तरीके से इन दवाओं को खाते हैं, तो आपके शरीर के भीतर मौजूद बैक्टीरिया उन दवाओं के खिलाफ लड़ने की क्षमता विकसित कर लेते हैं। परिणामस्वरुप, जब भविष्य में आपको सचमुच किसी गंभीर संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक की जरूरत होगी, तो वे दवाएं आपके शरीर पर बेअसर साबित होंगी।
आधे-अधूरे कोर्स की मार
एक और बड़ी समस्या दवाओं का कोर्स पूरा न करना है। संवाद 24 से बात करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि कई मरीज दो-तीन खुराक लेने के बाद थोड़ा बेहतर महसूस होते ही दवा छोड़ देते हैं। यह सबसे खतरनाक स्थिति है। इससे संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया पूरी तरह नहीं मरते, बल्कि वे खुद को दवा के अनुसार ढाल लेते हैं और ‘सुपरबग’ का रूप ले लेते हैं। यही कारण है कि आज निमोनिया, टीबी और टाइफाइड जैसी बीमारियों का इलाज करना पहले के मुकाबले कहीं अधिक कठिन और महंगा होता जा रहा है।
डॉक्टरों की सलाह: क्या करें और क्या न करें?
नोएडा के डॉक्टरों ने जनता से अपील की है कि वे अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ न करें। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं:
डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य: कभी भी मेडिकल स्टोर से खुद मांगकर एंटीबायोटिक न लें। केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर की सलाह पर ही इनका उपयोग करें।
कोर्स पूरा करें: यदि डॉक्टर ने पांच या सात दिन का कोर्स बताया है, तो ठीक महसूस होने के बावजूद उसे बीच में न छोड़ें।
पुरानी दवा का प्रयोग न करें: घर में बची हुई पुरानी एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल अगली बार बीमार पड़ने पर कभी न करें।
सफाई का ध्यान रखें: संक्रमण से बचने का सबसे अच्छा तरीका बार-बार हाथ धोना और स्वच्छता बनाए रखना है, ताकि दवाओं की जरूरत ही न पड़े।
भविष्य का संकट: जब दवाएं काम करना बंद कर देंगी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी बार-बार आगाह कर चुका है कि अगर एंटीबायोटिक का दुरुपयोग इसी तरह जारी रहा, तो साल 2050 तक दुनिया में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा करोड़ों में पहुंच सकता है। नोएडा के स्वास्थ्य विभाग ने भी अब मेडिकल स्टोर संचालकों को बिना प्रिस्क्रिप्शन के शेड्यूल-H दवाएं (एंटीबायोटिक) न बेचने के सख्त निर्देश देने की योजना बनाई है।






