रूस में भारतीय छात्रों के साथ ‘बड़ा खेल’: डॉक्टर बनने का सपना दिखा कर किया जा रहा शोषण

Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। विदेश जाकर डॉक्टर बनने और एक सुनहरा भविष्य बनाने का सपना आज कई भारतीय युवाओं के लिए किसी बुरे सपने (Nightmare) में बदलता जा रहा है। रूस, जो दशकों से भारतीय छात्रों के लिए मेडिकल की पढ़ाई का सबसे पसंदीदा केंद्र रहा है, वहां से अब शोषण और धोखाधड़ी की ऐसी खबरें आ रही हैं जिन्होंने भारत सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) की नींद उड़ा दी है। हाल ही में जारी आंकड़ों और रिपोर्टों के अनुसार, रूस में पढ़ रहे भारतीय छात्र बड़े पैमाने पर ‘एजेंटों’ और स्थानीय संस्थानों के शोषण का शिकार हो रहे हैं।

सस्ते पैकेज का ‘जाल’ और हकीकत
भारत में नीट (NEET) परीक्षा में कड़ी प्रतिस्पर्धा और निजी मेडिकल कॉलेजों की करोड़ों की फीस के कारण मध्यवर्गीय परिवार रूस का रुख करते हैं। वहां मेडिकल की पढ़ाई का खर्च भारत के मुकाबले काफी कम दिखाया जाता है। लेकिन विदेश मंत्रालय के पास पहुंची शिकायतों के अनुसार, भारत में बैठे एजेंट छात्रों को ‘सब कुछ मुफ्त’ और ‘आसान जीवन’ का झांसा देकर वहां भेज देते हैं। वहां पहुंचते ही छात्रों से छिपे हुए शुल्क वसूले जाते हैं, उन्हें घटिया हॉस्टलों में रखा जाता है और कई बार तो उन्हें उन भाषाओं में पढ़ने पर मजबूर किया जाता है, जिनकी उन्हें जानकारी तक नहीं होती।

शोषण का नया तरीका: पासपोर्ट जब्ती और धमकियां
सबसे गंभीर बात यह है कि कई छात्रों ने शिकायत की है कि वहां पहुंचने के बाद स्थानीय कंसल्टेंट या कॉलेज प्रशासन उनके पासपोर्ट अपने पास रख लेते हैं। इसके बाद शुरू होता है ब्लैकमेलिंग का सिलसिला। छात्रों को अतिरिक्त फीस न देने पर वापस भेजने या जेल भेजने की धमकियां दी जाती हैं। कई भारतीय छात्रों को रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच सुरक्षा संबंधी चिंताओं का भी सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उन्हें वहां से निकलने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं दिए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय का सख्त रुख
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में रूस से भारतीय छात्रों के शोषण से जुड़ी शिकायतों में 30% से अधिक की वृद्धि हुई है। भारत सरकार ने इस मामले को रूसी प्रशासन के साथ उच्च स्तर पर उठाया है। मंत्रालय ने छात्रों और उनके माता-पिता के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी भी एजेंट पर भरोसा करने से पहले वे कॉलेज की साख और वहां की वास्तविक स्थिति की जांच सरकारी पोर्टलों के माध्यम से जरूर करें।

फर्जी यूनिवर्सिटी और मान्यता का संकट
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रूस के कई कॉलेज ऐसे हैं जिनकी डिग्री भारत में मान्य नहीं है। छात्र वहां 6 साल और लाखों रुपये खर्च करने के बाद जब भारत लौटते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि वे यहां डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस ही नहीं कर सकते। यह न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक रूप से भी युवाओं को तोड़ रहा है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News