धनबाद SNMMCH में ‘अग्निकांड’ का तांडव: खाक हुए अस्पताल के महत्वपूर्ण दस्तावेज, क्या ये महज एक हादसा है?
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संवाद 24 झारखंड । धनबाद स्थित शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SNMMCH) में एक बार फिर आग की लपटों ने कोहराम मचा दिया है। इस बार आग अस्पताल के प्रशासनिक ब्लॉक और कार्यालय कक्ष में लगी, जिसने न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि अस्पताल के कई वर्षों के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और दस्तावेजों को भी राख के ढेर में तब्दील कर दिया। आधी रात के बाद लगी इस आग ने अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
धुएं के गुबार और रिकॉर्ड रूम की तबाही
घटना की शुरुआत उस वक्त हुई जब अस्पताल परिसर के प्रशासनिक विभाग से धुएं का काला गुबार निकलने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और उन कमरों को अपनी चपेट में ले लिया जहां अस्पताल के महत्वपूर्ण फाइलें, कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड और पुराने बिल रखे हुए थे। गनीमत यह रही कि आग वार्डों तक नहीं पहुंची, वरना मरीजों की जान पर बन सकती थी। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन जब तक आग पर काबू पाया जाता, तब तक कार्यालय में रखे अधिकांश कागजात जलकर स्वाहा हो चुके थे।
साजिश या शॉर्ट सर्किट? उठ रहे हैं कई सवाल
अस्पताल प्रबंधन ने शुरुआती जांच के बाद आग लगने का कारण बिजली का ‘शॉर्ट सर्किट’ बताया है, लेकिन स्थानीय गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारों का कहना है कि जिस विभाग में आग लगी, वहां कई महत्वपूर्ण जांचों से जुड़े दस्तावेज रखे थे। ऐसे में क्या यह केवल एक तकनीकी खामी थी या किसी बड़े घोटाले या गड़बड़ी के सबूतों को मिटाने की कोई सोची-समझी साजिश? यह सवाल अब हवा में तैर रहा है। पुलिस और फोरेंसिक टीमें इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि क्या आग वाकई अपने आप लगी या इसे ‘लगाया’ गया था।
सुरक्षा मानकों की खुली पोल
धनबाद के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी डायलिसिस यूनिट और अन्य विभागों में शॉर्ट सर्किट की खबरें आती रही हैं। पिछली घटनाओं से सबक न लेना अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम और एनओसी (NOC) की स्थिति हमेशा से विवादों में रही है। करोड़ों के बजट वाले इस मेडिकल कॉलेज में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम न होना और फायर अलार्म का सक्रिय न होना प्रशासन के ढुलमुल रवैये को उजागर करता है।
अस्त-व्यस्त हुआ प्रशासनिक कार्य
दस्तावेजों के जल जाने से अब अस्पताल का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। कर्मचारियों की सैलरी, पेंडिंग बिल और भविष्य निधि से जुड़े कई रिकॉर्ड अब इतिहास बन चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि वे डिजिटल डेटा के जरिए रिकॉर्ड्स को फिर से रिकवर करने की कोशिश करेंगे, लेकिन मैनुअल फाइलों की भरपाई नामुमकिन है।
जांच कमेटी का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। उपायुक्त ने निर्देश दिए हैं कि आग के असली कारणों का पता लगाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।






