कचरे से ‘कंचन’ बना बिहार: 105 किमी प्लास्टिक की सड़कों ने रचा इतिहास, अब बाढ़ और बारिश भी नहीं बिगाड़ पाएगी रास्ता!

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संवाद 24 बिहार। बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर एक ऐसी अनूठी पहल की गई है, जिसने न केवल पर्यावरण प्रेमियों का दिल जीत लिया है, बल्कि पूरे देश के सामने ‘वेस्ट मैनेजमेंट’ (Waste Management) का एक सफल मॉडल भी पेश किया है। बिहार सरकार ने राज्य में करीब 105 किलोमीटर लंबी ऐसी सड़कों का निर्माण पूरा कर लिया है, जो पूरी तरह से रीसायकल किए गए प्लास्टिक कचरे से बनी हैं। यह नवाचार बिहार जैसे राज्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जहाँ हर साल भारी बारिश और बाढ़ सड़कों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर देती है।

प्लास्टिक का ‘कवच’: टिकाऊ और किफायती
सामान्य सड़कें केवल बिटुमेन (डामर) और गिट्टी से बनती हैं, जो पानी के संपर्क में आने पर जल्दी टूटने लगती हैं। लेकिन बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग ने ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के तहत एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसमें गर्म बिटुमेन के साथ कचरे से जमा किए गए प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़ों (Shredded Plastic) को मिलाया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्लास्टिक और बिटुमेन का यह मिश्रण सड़क को ‘वॉटरप्रूफ’ बना देता है। चूंकि प्लास्टिक पानी को सोखता नहीं है, इसलिए बारिश का पानी सड़क की सतह के अंदर नहीं जा पाता, जिससे गड्ढे होने की संभावना 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है।

105 किलोमीटर का सफर और पर्यावरण को राहत
पटना, भागलपुर, और पूर्णिया जैसे जिलों में इन सड़कों का जाल बिछाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 105 किलोमीटर की सड़क बनाने में टन के हिसाब से उस प्लास्टिक का उपयोग किया गया है, जो अन्यथा नदियों में बहकर उन्हें प्रदूषित करता या डंपिंग ग्राउंड में जल प्रदूषण का कारण बनता। इस तकनीक से न केवल प्लास्टिक प्रदूषण कम हुआ है, बल्कि डामर (Bitumen) की खपत में भी 8 से 10 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये की बचत हुई है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए वरदान
बिहार का एक बड़ा हिस्सा हर साल कोसी और गंडक जैसी नदियों की बाढ़ झेलता है। पारंपरिक सड़कें बाढ़ के पानी में बह जाती हैं, लेकिन प्लास्टिक मिश्रित सड़कें अधिक लचीली और मजबूत होती हैं। इनकी ‘लोड बेयरिंग कैपेसिटी’ (भार सहने की क्षमता) सामान्य सड़कों से कहीं ज्यादा है। इसका मतलब है कि अब ग्रामीण इलाकों में भारी अनाज के ट्रक गुजरने पर भी सड़क धंसने का डर नहीं रहेगा।

रोजगार के नए अवसर
इस परियोजना ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार भी खोले हैं। प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करने वाले (Ragpickers) और कचरा प्रबंधन इकाइयों (Waste Processing Units) को अब सीधे सरकार और ठेकेदारों से काम मिल रहा है। कचरे को छांटने, साफ करने और उसे सड़क निर्माण के योग्य बनाने के लिए राज्य में कई नए प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जा रहे हैं।

भविष्य की सड़कें
बिहार की यह उपलब्धि ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और ‘स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ के संगम का एक शानदार उदाहरण है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम के तहत इस पहल को अब राज्य के अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जा रहा है। अगर यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहता है, तो वह दिन दूर नहीं जब बिहार की हर पंचायत ‘प्लास्टिक मुक्त’ होगी और वहाँ की सड़कें ‘प्लास्टिक युक्त’ और मजबूत होंगी।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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