ओला-उबर के साम्राज्य में सरकार की ‘डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक’! अब बिना किसी ‘ऐप’ के बुक होगी सबसे सस्ती टैक्सी; जानें क्या है ONDC का पूरा गणित
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत में टैक्सी और ऑटो बुकिंग की दुनिया में एक बहुत बड़ा बदलाव चुपके से दस्तक दे चुका है। पिछले कई सालों से ओला और उबर जैसी विदेशी निवेश वाली कंपनियों ने भारतीय बाजार पर अपना कब्जा जमा रखा था, लेकिन अब केंद्र सरकार के ONDC (Open Network for Digital Commerce) ने इस एकाधिकार (Monopoly) की जड़ें हिला दी हैं। गृह मंत्री अमित शाह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में जिस ‘ओपन नेटवर्क’ को बढ़ावा दिया जा रहा है, वह अब दिल्ली, बेंगलुरु और कोच्चि जैसे शहरों में टैक्सी ड्राइवरों के लिए ‘मसीहा’ बनकर उभरा है।
क्या है ONDC? कोई ऐप नहीं, बल्कि एक डिजिटल हाईवे
अक्सर लोग इसे ‘भारत टैक्सी ऐप’ समझ लेते हैं, लेकिन असलियत इससे कहीं अधिक क्रांतिकारी है। ONDC कोई ऐप नहीं है, बल्कि एक सरकारी डिजिटल नेटवर्क है। इसे सरल भाषा में ऐसे समझें: जैसे आप किसी भी बैंक के ऐप से किसी भी क्यूआर (QR) कोड पर पैसे भेज सकते हैं (UPI के जरिए), ठीक वैसे ही अब आप किसी भी ऐप से किसी भी टैक्सी को बुक कर सकेंगे। इसके लिए आपको फोन में दस अलग-अलग ऐप रखने की जरूरत नहीं होगी।
ड्राइवरों की बढ़ेगी कमाई, यात्रियों की होगी बचत
वर्तमान में निजी कंपनियां टैक्सी ड्राइवरों से हर राइड पर 25 से 30 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन वसूलती हैं। यानी अगर आप 100 रुपये देते हैं, तो ड्राइवर को केवल 70 रुपये मिलते हैं। लेकिन ONDC के नेटवर्क पर चलने वाले ऐप (जैसे- ‘नम्मा यात्री’ या ‘यात्री ऐप’):
जीरो कमीशन: ड्राइवरों से कोई कमीशन नहीं लेते, या केवल एक छोटा सा ‘सॉफ्टवेयर शुल्क’ लेते हैं।
सीधा भुगतान: यात्री का पैसा सीधे ड्राइवर के बैंक खाते में जाता है।
सस्ता किराया: चूंकि बीच में कंपनी का कमीशन खत्म हो गया है, इसलिए यात्रियों को वही दूरी तय करने के लिए ओला-उबर के मुकाबले 15-20% कम किराया देना पड़ता है।
सर्ज प्राइसिंग के ‘जाल’ से मिलेगी मुक्ति
बारिश शुरू होते ही या ऑफिस के समय ओला-उबर का किराया अचानक दोगुना हो जाता है, जिसे ‘सर्ज प्राइसिंग’ कहा जाता है। ONDC के आने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। जब यात्री को दिखेगा कि सरकारी नेटवर्क पर टैक्सी सामान्य रेट पर उपलब्ध है, तो निजी कंपनियों को भी अपनी दरें कम करने पर मजबूर होना पड़ेगा। सरकार का उद्देश्य तकनीक के जरिए आम जनता को इन ‘प्राइसिंग एल्गोरिदम’ के चंगुल से छुड़ाना है।
कैसे करें इस्तेमाल?
जल्द ही आपके फोन में मौजूद Paytm, PhonePe या Pincode जैसे ऐप्स के भीतर ही ‘कैब’ या ‘टैक्सी’ का विकल्प दिखाई देने लगेगा। यह ऑप्शन सीधे ONDC नेटवर्क से जुड़ा होगा। आपको बस अपनी लोकेशन डालनी होगी और आपके आस-पास मौजूद सभी स्वतंत्र टैक्सी और ऑटो ड्राइवर आपको दिखाई दे जाएंगे।
आत्मनिर्भर भारत की ओर एक और कदम
भारत सरकार का यह कदम केवल परिवहन तक सीमित नहीं है। ONDC के जरिए खाने-पीने का सामान (Food Delivery) और किराने का सामान (Grocery) भी सस्ता करने की तैयारी है। यह ‘डिजिटल इंडिया’ का वह चेहरा है जहाँ मुनाफा बड़ी कंपनियों की जेब में जाने के बजाय सीधे गरीब और मध्यम वर्ग के हाथ में पहुँच रहा है।






