संसद में भारी हंगामा: राहुल गांधी के दावों और पूर्व सेना प्रमुख की डायरी ने बढ़ाई सियासी तपिश
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संवाद 24 नई दिल्ली। लोकतंत्र के मंदिर लोकसभा में सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने भारतीय राजनीति और सीमा सुरक्षा के मुद्दों पर एक नई बहस छेड़ दी है। सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जैसे ही पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की संस्मरण पुस्तक (Memoir) का जिक्र किया, पूरे सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। राहुल गांधी के दावों और सरकार के कड़े प्रतिरोध के बीच संसद की कार्यवाही में जबरदस्त गतिरोध देखने को मिला।
क्या है पूरा मामला?
लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की आगामी पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) के कुछ अंशों का हवाला देना चाहा। राहुल गांधी ने दावा किया कि इस पुस्तक में चीन के साथ सीमा विवाद और डोकलाम की स्थिति को लेकर कुछ ऐसी बातें कही गई हैं, जो सरकार के आधिकारिक बयानों से मेल नहीं खातीं। उन्होंने एक मैगजीन में छपे लेख का हवाला देते हुए कहा कि चीनी टैंकों के डोकलाम में घुसने की बात उस लेख में दर्ज है।
सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक
राहुल गांधी के इन दावों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत मोर्चा संभाला। रक्षा मंत्री ने कड़ी आपत्ति जताते हुए राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वह पुस्तक वास्तव में प्रकाशित हुई है? राजनाथ सिंह ने सदन को बताया कि जिस पुस्तक का राहुल गांधी जिक्र कर रहे हैं, वह अभी तक बाजार में आई ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अप्रकाशित और अपुष्ट सामग्री के आधार पर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने भी पलटवार करते हुए कहा कि सदन की गरिमा के खिलाफ ऐसी सामग्री को उद्धृत नहीं किया जा सकता, जिसकी सत्यता की पुष्टि न की गई हो। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी खुद स्वीकार कर रहे हैं कि पुस्तक अभी प्रकाशित नहीं हुई है, तो उसे आधिकारिक तौर पर संसद की कार्यवाही का हिस्सा कैसे बनाया जा सकता है?
स्पीकर का हस्तक्षेप और नियम
विवाद बढ़ता देख लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सदन में किसी भी ऐसी पुस्तक, समाचार पत्र या रिपोर्ट का संदर्भ नहीं दिया जा सकता जो प्रमाणित न हो या जो सदन की कार्यवाही से सीधे तौर पर संबंधित न हो। उन्होंने राहुल गांधी को निर्देश दिया कि वे उस हिस्से को छोड़कर अपना भाषण जारी रखें। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार नारेबाजी हुई, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा।
सियासी गलियारों में चर्चा
राहुल गांधी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वे यह मुद्दा इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि बीजेपी के सांसद तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल उठाए थे। राहुल ने जोर देकर कहा कि वे जो कह रहे हैं वह ‘100 प्रतिशत प्रामाणिक’ है और देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सच सामने आने से डर रही है। वहीं, दूसरी ओर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने कहा कि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील विषयों पर अप्रमाणित दावों का उपयोग करना भारतीय सेना के मनोबल को गिराने जैसा है। संसद में हुए इस हंगामे ने एक बार फिर भारत-चीन सीमा विवाद को देश की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। जहां विपक्ष पारदर्शी चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं सरकार का रुख है कि संवेदनशील सैन्य मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। जनरल नरवणे की पुस्तक, जो अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है,






