बजट 2026 पर संसद में आज बड़ा इम्तिहान, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

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संवाद 24 नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 पेश होने के बाद आज संसद में इस पर विस्तृत चर्चा होने जा रही है। लोकसभा में तय बहस को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। सरकार इस बजट को देश की अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आधार बता रही है, जबकि विपक्ष इसे आम जनता की समस्याओं से दूर करार दे रहा है। ऐसे में आज संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की पूरी संभावना है।

बजट के बाद संसद का बदला हुआ माहौल
बजट सामने आने के साथ ही संसद के गलियारों में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सत्ता पक्ष जहां इसे भविष्य की दिशा तय करने वाला दस्तावेज बता रहा है, वहीं विपक्ष का कहना है कि इसमें जमीनी सच्चाई को नजरअंदाज किया गया है। आज की चर्चा को इसी टकराव का मंच माना जा रहा है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क मजबूती से रखने की तैयारी में हैं।

सरकार का दावा: विकास की मजबूत नींव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट को सरकार ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़कर देख रही है। सरकार का कहना है कि बजट में बुनियादी ढांचे के विस्तार, निवेश को बढ़ावा देने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर खास जोर दिया गया है। सत्ता पक्ष के अनुसार, ये कदम आने वाले वर्षों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे।

विपक्ष की तैयारी: जनसमस्याओं पर हमला
विपक्षी दलों की रणनीति साफ नजर आ रही है। आज की बहस में बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की आय और मध्यम वर्ग पर बढ़ते खर्च जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। विपक्ष का आरोप है कि बजट में बड़ी योजनाओं की बात तो की गई है, लेकिन आम आदमी को तत्काल राहत देने वाले उपायों की कमी है।

युवाओं और किसानों को लेकर सवाल
विपक्ष का कहना है कि देश का युवा वर्ग रोजगार की तलाश में भटक रहा है, लेकिन बजट में स्थायी और ठोस रोजगार सृजन की तस्वीर स्पष्ट नहीं है। इसी तरह किसानों को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि खेती की लागत बढ़ रही है, लेकिन किसानों की आय बढ़ाने के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान नजर नहीं आते।

मध्यम वर्ग की उम्मीदें और निराशा
मध्यम वर्ग को इस बजट से काफी उम्मीदें थीं, खासकर करों और महंगाई से राहत को लेकर। विपक्ष का आरोप है कि बजट इन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। बढ़ती कीमतों और रोजमर्रा के खर्चों के बीच आम परिवार को राहत देने के लिए जो कदम उठाए जाने चाहिए थे, वे नदारद हैं।

सरकार का जवाब: दीर्घकालिक सोच जरूरी
सरकार का कहना है कि बजट को तात्कालिक राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। सत्ता पक्ष के अनुसार, यह बजट लंबी अवधि की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ मंत्री यह तर्क दे रहे हैं कि मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए अनुशासन और निरंतर निवेश जरूरी है।

वैश्विक हालात का हवाला
सरकार की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत को संतुलित बजट की जरूरत थी। सत्ता पक्ष का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए वित्तीय संतुलन बनाए रखना जरूरी था, ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

संसद की बहस से तय होगी आगे की दिशा
आज होने वाली बहस को मौजूदा सत्र के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस चर्चा से यह साफ होगा कि बजट 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल किस दिशा में जाएगा। यदि विपक्ष अपने तर्कों से दबाव बनाने में सफल रहता है, तो सरकार को जवाबदेही बढ़ानी पड़ सकती है।

राजनीतिक संकेत और आने वाले दिन
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बहस केवल बजट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले महीनों की राजनीति की दिशा भी तय करेगी। सरकार जहां विकास की कहानी को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष जनसमस्याओं को केंद्र में रखकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।

जनता की नजरें संसद पर टिकीं
कुल मिलाकर, आज संसद में होने वाली चर्चा यह बताएगी कि बजट 2026 को लेकर जनता के बीच कौन-सा पक्ष ज्यादा भरोसा पैदा कर पाता है। सरकार और विपक्ष के तर्कों के बीच फैसला अंततः जनता की राय से ही तय होगा, लेकिन आज की बहस इस दिशा में एक बड़ा संकेत जरूर देगी।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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