यूपी-बिहार के लिए खुला कुबेर का खजाना: वाराणसी और पटना बनेंगे बड़े शिपिंग हब, गंगा के रास्ते अब दौड़ेगा व्यापार
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संवाद 24 नई दिल्ली । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में पेश किए गए बजट 2026-27 में उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए उम्मीदों का नया द्वार खोल दिया है। पूर्वांचल और बिहार के आर्थिक विकास को नई गति देते हुए वित्त मंत्री ने वाराणसी और पटना में आधुनिक ‘शिप रिपेयरिंग सेंटर’ (जहाज मरम्मत केंद्र) स्थापित करने की ऐतिहासिक घोषणा की है। यह कदम न केवल नदियों के रास्ते होने वाले व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा।
गंगा बनेगी व्यापार की नई जीवनरेखा
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य गंगा समेत देश की अन्य प्रमुख नदियों के जलमार्गों का अधिकतम उपयोग करना है। अब तक सड़कों और रेलवे पर माल ढुलाई का अत्यधिक बोझ रहा है, जिसे कम करने के लिए जलमार्गों को एक सशक्त विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है। वाराणसी और पटना में शिप रिपेयरिंग सेंटरों की स्थापना से इन क्षेत्रों में मालवाहक जहाजों (कार्गो शिप्स) का आवागमन सुगम होगा। अगर बीच रास्ते में किसी जहाज में तकनीकी खराबी आती है, तो अब उसे दूर दराज के बंदरगाहों पर नहीं ले जाना पड़ेगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
वाराणसी और पटना का बदलेगा स्वरूप
वाराणसी, जो पहले से ही जलमार्ग परिवहन का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है, अब तकनीकी रूप से और भी समृद्ध होगा। वहीं बिहार की राजधानी पटना, जो ऐतिहासिक रूप से व्यापार का केंद्र रही है, अब आधुनिक शिपिंग उद्योग के मानचित्र पर प्रमुखता से उभरेगी। इन सेंटरों के बनने से सहायक उद्योगों (Auxiliary Industries) का भी विस्तार होगा। स्पेयर पार्ट्स बनाने वाली इकाइयों, पेंटिंग, वेल्डिंग और तकनीकी सेवाओं से जुड़े लघु उद्योगों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश उत्तर प्रदेश और बिहार के पिछड़े इलाकों की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।
युवाओं के लिए खुलेंगे नौकरियों के द्वार
यूपी और बिहार के युवाओं के लिए इस बजट में सबसे बड़ी खुशखबरी रोजगार के मोर्चे पर आई है। शिप रिपेयरिंग एक तकनीकी क्षेत्र है, जिसमें कुशल इंजीनियरों, मैकेनिकों और तकनीशियनों की भारी आवश्यकता होती है। वाराणसी और पटना में इन केंद्रों के खुलने से स्थानीय स्तर पर स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा। सरकार इन केंद्रों के आसपास प्रशिक्षण संस्थान खोलने की भी योजना बना रही है, ताकि स्थानीय युवाओं को सीधे इन केंद्रों में नौकरी मिल सके।
रसद लागत (Logistics Cost) में आएगी कमी
भारत के लिए रसद लागत को कम करना एक बड़ी चुनौती रही है। जलमार्ग के जरिए माल ढुलाई सबसे सस्ता माध्यम माना जाता है। यूपी और बिहार जैसे लैंडलॉक्ड (landlocked) राज्यों के लिए, जहां समुद्र नहीं है, वहां नदियों के जरिए बड़े जहाजों का संचालन और उनकी मरम्मत की सुविधा होना किसी वरदान से कम नहीं है। इससे खाद्यान्न, निर्माण सामग्री और औद्योगिक माल की आवाजाही सस्ती होगी, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा और आम जनता को लाभ होगा।
डबल इंजन की रफ्तार को मिला नया ईधन
बजट 2026 में यूपी और बिहार पर विशेष फोकस यह दर्शाता है कि सरकार इन दोनों राज्यों को देश की विकास दर का नया इंजन बनाना चाहती है। वाराणसी और पटना में शिप रिपेयरिंग सेंटरों की घोषणा महज एक औद्योगिक फैसला नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं का प्रतीक है जो गंगा के किनारों पर बेहतर भविष्य का सपना देखते हैं। बुनियादी ढांचे के इस मजबूत विस्तार से आने वाले वर्षों में पूर्वांचल और बिहार के आर्थिक परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा।






