बंगाल फतह का नया ब्लूप्रिंट: कोलकाता पहुंचे अमित शाह, बैरकपुर और सिलीगुड़ी में हुंकार से बदलेंगे चुनावी समीकरण
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संवाद 24 पश्चिम बंगाल। राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह आज कोलकाता पहुंच चुके हैं। उनका यह दौरा महज एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि बंगाल के सियासी रणक्षेत्र में भाजपा की पैठ को और मजबूत करने का एक बड़ा अभियान माना जा रहा है। शाह आज बैरकपुर और सिलीगुड़ी में विशाल कार्यकर्ता सम्मेलनों को संबोधित करेंगे, जिसे आगामी चुनावों की तैयारियों के शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है।
हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत और रणनीतिक बैठक
अमित शाह के कोलकाता पहुंचने पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। हवाई अड्डे के बाहर कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम उमड़ा, जो ‘जय श्री राम’ और पार्टी के समर्थन में नारेबाजी कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक, शाह ने कोलकाता पहुंचते ही प्रदेश नेतृत्व के साथ एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें राज्य की वर्तमान कानून-व्यवस्था और पार्टी के सांगठनिक ढांचे पर चर्चा की गई।
बैरकपुर: औद्योगिक बेल्ट में ‘शक्ति प्रदर्शन’
अमित शाह का पहला बड़ा पड़ाव उत्तर 24 परगना जिले का बैरकपुर है। बैरकपुर ऐतिहासिक रूप से औद्योगिक और जूट मिलों का क्षेत्र रहा है, जहाँ की राजनीति सीधे तौर पर श्रमिकों और आम जनमानस से जुड़ी है। यहाँ आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में शाह का मुख्य फोकस जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं (बूथ लेवल वर्कर्स) को सक्रिय करना है। बैरकपुर में शाह की रैली के कई मायने हैं। यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील रहा है और भाजपा यहाँ अपनी पकड़ को और पुख्ता करना चाहती है। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शाह राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करने के साथ-साथ केंद्र सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत करेंगे।
सिलीगुड़ी: उत्तर बंगाल का प्रवेश द्वार और चुनावी चाबी
बैरकपुर के बाद अमित शाह सीधे सिलीगुड़ी के लिए रवाना होंगे। उत्तर बंगाल हमेशा से भाजपा के लिए एक मजबूत गढ़ रहा है। सिलीगुड़ी में होने वाला सम्मेलन न केवल दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पूरे उत्तर बंगाल को एक कड़ा संदेश देने की कोशिश है।
सिलीगुड़ी में शाह का संबोधन चाय बागान श्रमिकों के मुद्दों, शरणार्थी समस्याओं और क्षेत्र के विकास पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर बंगाल में अपनी बढ़त बनाए रखना भाजपा के लिए अनिवार्य है, और शाह खुद इसकी कमान संभाल रहे हैं।
ममता सरकार पर हमले और ‘मिशन बंगाल’
इस दौरे के दौरान अमित शाह के निशाने पर सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार रहने वाली है। भ्रष्टाचार के आरोप, संदेशखाली जैसी घटनाएं और कानून-व्यवस्था के मुद्दे शाह के भाषणों के मुख्य बिंदु हो सकते हैं। शाह अक्सर अपने भाषणों में ‘डबल इंजन की सरकार’ का जिक्र करते हैं, और इस बार भी वह बंगाल की जनता को यह समझाने की कोशिश करेंगे कि विकास के लिए केंद्र और राज्य में एक ही दल का होना क्यों जरूरी है।
कार्यकर्ताओं में फूंकेंगे नई जान
भाजपा के लिए यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि आने वाले समय में पंचायत और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मी बढ़ने वाली है। अमित शाह का सीधा संवाद कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने का काम करेगा। वह ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत’ के मंत्र को एक बार फिर दोहराएंगे और कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर केंद्र की योजनाओं का प्रचार करने का लक्ष्य देंगे। अमित शाह का यह एक दिवसीय बंगाल दौरा राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। एक तरफ जहां टीएमसी इसे भाजपा की ‘विभाजनकारी राजनीति’ बता रही है, वहीं भाजपा इसे ‘सोनार बांग्ला’ के निर्माण की दिशा में एक और कदम मान रही है। कोलकाता से लेकर सिलीगुड़ी तक, आज पूरे बंगाल की नजरें शाह के बयानों और उनकी रणनीतियों पर टिकी हैं।






