खौफ के 14 दिन और आधी रात का वो ‘ऑपरेशन रिकवरी’: जमशेदपुर के लाल कैरव गांधी की वापसी की पूरी दास्तान
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संवाद 24 झारखंड। औद्योगिक राजधानी जमशेदपुर में पिछले दो हफ्तों से फैला सन्नाटा और दहशत की लहर आखिरकार मंगलवार तड़के एक राहत भरी खबर में बदल गई। शहर के नामचीन उद्योगपति देवांग गांधी के 24 वर्षीय पुत्र कैरव गांधी, जिनका 13 जनवरी को फिल्मी अंदाज में अपहरण कर लिया गया था, सकुशल अपने घर लौट आए हैं। यह केवल एक युवक की घर वापसी नहीं है, बल्कि झारखंड पुलिस की उस रणनीति की जीत है, जिसने अपहरणकर्ताओं को घुटने टेकने और शिकार को छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
साजिश का जाल: हनीट्रैप से लेकर इंटरनेशनल कॉल तक
घटना की शुरुआत 13 जनवरी को हुई थी, जब कैरव अपने घर से आदित्यपुर स्थित अपनी फैक्ट्री के लिए निकले थे। कदमा-सोनारी लिंक रोड पर अपराधियों ने बड़ी ही चालाकी से उनकी कार को रोका और उन्हें अगवा कर लिया। पुलिस को शुरुआती सुराग कांडबेड़ा (चांडिल) के पास लावारिस खड़ी उनकी कार से मिला, जिसकी चाबियां इग्निशन में ही थीं और मोबाइल नीचे गिरा हुआ था। मामले ने तब अंतरराष्ट्रीय तूल पकड़ लिया जब परिवार को इंडोनेशिया के एक नंबर से व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए 5 करोड़ रुपये (कुछ सूत्रों के अनुसार 10 करोड़) की फिरौती की मांग की गई। धमकी दी गई थी कि अगर 48 घंटों में पैसा नहीं मिला, तो परिणाम भयानक होंगे। पुलिस की जांच में ‘सिंह साहब गिरोह’ और ‘अजय प्रताप सिंह गैंग’ जैसे अंतरराज्यीय गिरोहों के नाम सामने आए, जो हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग के लिए कुख्यात हैं।
पुलिस का बढ़ता दबाव और अपहरणकर्ताओं का सरेंडर
झारखंड की पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा और जमशेदपुर के एसएसपी पीयूष पांडेय ने इस मामले को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। सिटी एसपी कुमार शिवाशीष के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जिसमें 7 अलग-अलग टीमें बनाई गईं। पुलिस ने झारखंड के साथ-साथ बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की। तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों से मिली सटीक सूचना ने अपराधियों के घेरे को छोटा कर दिया। पुलिस को खबर मिली थी कि अपहरणकर्ता कैरव को बिहार की सीमा की ओर शिफ्ट करने की योजना बना रहे हैं। हजारीबाग-गया रोड पर जीटी रोड (NH-2) पर पुलिस की बढ़ती सक्रियता और नाकेबंदी को देख अपहरणकर्ता घबरा गए। उन्हें लगा कि अब बचना नामुमकिन है, जिसके बाद उन्होंने कैरव को हजारीबाग के बरही-चौपारण खंड पर सड़क किनारे छोड़ दिया और अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
आधी रात का वो भावुक मिलन
मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे, जब पूरा शहर सो रहा था, पुलिस की एक टीम ने कैरव को सुरक्षित बरामद किया। बरामदगी के तुरंत बाद कैरव ने अपने पिता से बात की। एसएसपी पीयूष पांडेय ने बताया कि कैरव पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनके साथ कोई शारीरिक प्रताड़ना नहीं की गई थी। हालांकि, 14 दिनों तक अज्ञात ठिकानों पर कैद रहने के कारण वह मानसिक रूप से थोड़े थके हुए जरूर थे।
अनसुलझे सवाल: क्या पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़?
सूत्रों की मानें तो पुलिस और अपराधियों के बीच कुछ जगहों पर आमना-सामना होने की भी खबरें आई थीं, लेकिन पुलिस ने मुख्य प्राथमिकता कैरव की सुरक्षित वापसी को दी। हालांकि अपराधियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है, लेकिन पुलिस के पास अब पुख्ता सुराग हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस पूरी साजिश के पीछे एक महिला का भी हाथ हो सकता है, जिसने ‘हनीट्रैप’ के जरिए कैरव को जाल में फंसाया। फिलहाल, गांधी परिवार में खुशी का माहौल है और उन्होंने पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। जमशेदपुर पुलिस के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है, जिसने बिना किसी जान-माल के नुकसान के इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझा लिया। पुलिस अब उन चेहरों को बेनकाब करने में जुटी है, जिन्होंने इंडोनेशिया से बैठकर जमशेदपुर में खौफ का यह खेल रचा था।






