चंडीगढ़ की सत्ता पर भाजपा का कब्ज़ा: सौरभ जोशी बने नए मेयर, आप-कांग्रेस गठबंधन को लगा ज़ोरदार झटका
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संवाद 24 चंडीगढ़। राजधानी के नगर निगम में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी बादशाहत साबित कर दी है। गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को हुए हाई-वोल्टेज मेयर चुनाव में भाजपा के दिग्गज पार्षद सौरभ जोशी ने शानदार जीत दर्ज की है। खास बात यह रही कि इस बार मतदान की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए ‘सीक्रेट बैलेट’ की जगह पार्षदों ने ‘हाथ उठाकर’ अपने नेता का चुनाव किया। भाजपा ने न केवल मेयर पद, बल्कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर भी कब्ज़ा जमाकर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया है।
वोटों का गणित: त्रिकोणीय मुकाबले में बाजी मारी
सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, जहाँ 35 पार्षदों और एक सांसद (मनीष तिवारी) ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 36 सदस्यीय सदन में सौरभ जोशी को 18 वोट मिले। वहीं, आम आदमी पार्टी के योगेश धींगड़ा को 11 और कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह गबी को केवल 7 वोटों से संतोष करना पड़ा। विपक्षी एकता में दरार का फायदा सीधे तौर पर भाजपा को मिला। ‘इंडिया गठबंधन’ (INDIA Alliance) के सहयोगी ‘आप’ और कांग्रेस ने इस बार अलग-अलग उम्मीदवार उतार दिए थे, जिससे विपक्षी वोट बंट गए और सौरभ जोशी की राह आसान हो गई।
सौरभ जोशी: विरासत और विकास का चेहरा
मेयर चुने जाने के बाद सौरभ जोशी काफी भावुक नजर आए। वे वार्ड नंबर 12 से पार्षद हैं और चंडीगढ़ भाजपा के दिवंगत दिग्गज नेता जय राम जोशी के पुत्र हैं। जीत के बाद उन्होंने अपने पिता की तस्वीर हाथ में लेकर जश्न मनाया और कहा, “यह जीत उन कार्यकर्ताओं की है जो 1989 से बूथ पर संघर्ष कर रहे हैं। मेरी प्राथमिकता चंडीगढ़ को विकास और स्वच्छता में नंबर-1 बनाना है।”
पूरी टीम भाजपा की: डिप्टी मेयर पदों पर भी कब्ज़ा
मेयर पद के साथ-साथ भाजपा के जसमनप्रीत सिंह सीनियर डिप्टी मेयर और सुमन शर्मा डिप्टी मेयर चुनी गईं। सुमन शर्मा, जो चुनाव से कुछ दिन पहले ही ‘आप’ छोड़कर भाजपा में शामिल हुई थीं, की जीत ने विपक्ष को करारा झटका दिया है। कांग्रेस पार्षदों ने मेयर चुनाव के बाद सदन से वॉकआउट कर दिया, जबकि ‘आप’ पार्षदों ने अंत तक हार का सामना किया।
विपक्ष के आरोप और नई चुनौतियां
आम आदमी पार्टी के चंडीगढ़ प्रभारी जरनैल सिंह ने कांग्रेस पर परोक्ष रूप से भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भाजपा पर जोड़-तोड़ की राजनीति करने का आरोप मढ़ा। हालांकि, चुनावी पर्यवेक्षक विनोद तावड़े ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और नियमों के अनुकूल बताया। सौरभ जोशी के लिए यह कार्यकाल चुनौतियों भरा होगा क्योंकि यह वर्तमान नगर निगम का आखिरी साल है। उनके सामने डंपिंग ग्राउंड का मुद्दा हल करना और शहर में पानी-बिजली की व्यवस्था को सुदृढ़ करने जैसी बड़ी जिम्मेदारियां हैं।
विश्लेषण कहता है कि चंडीगढ़ की इस जीत ने भाजपा के लिए 2026 के आने वाले चुनावों के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर दिया है। विपक्ष की आपसी फूट ने भाजपा को एक ‘वॉकओवर’ जैसी स्थिति दे दी, जिसका फायदा उठाकर भगवा पार्टी ने पूरे निगम पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।






