राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ संसद का बजट सत्र शुरू, 1 फरवरी को पेश होगा केंद्रीय बजट
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत के संसदीय इतिहास का सबसे चर्चित बजट सत्र आज यानी 28 जनवरी 2026 (बुधवार) से शुरू हो गया है, जिसका औपचारिक आगाज़ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संयुक्त अभिभाषण से हुआ। इस सत्र को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे न केवल आगामी आर्थिक दिशा तय होगी, बल्कि सरकार-विपक्ष के बीच कई गंभीर बहसें भी सामने आ सकती हैं।
दो चरणों में चलेगा सत्र — क्या है पूरा शेड्यूल?
इस बार का बजट सत्र कुल दो चरणों/खंडों में आयोजित किया जा रहा है। पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा, और फिर 9 मार्च से दोबारा शुरू होकर 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस दौरान कुल करीब 30 बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें दोनों सदनों — लोकसभा व राज्यसभा — में विस्तृत बहसें और निर्णय लिए जाएंगे।
1 फरवरी 2026: बजट पेश होने का बड़ा दिन
तकनीकी रूप से सबसे अहम दिन 1 फरवरी 2026 (रविवार) है, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में केंद्र सरकार का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। संसद के इतिहास में यह पहली बार है कि बजट पेश करने का दिन रविवार चुना गया है, जिससे इस सत्र की खासियत और भी बढ़ गई है।
सर्वदलीय बैठक से मिली नीतिगत दिशा
बजट सत्र शुरू होने से एक दिन पहले, राजधानी नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में कई विपक्षी और सहयोगी दलों के नेता शामिल हुए, जहां सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित और बिना व्यवधान के चलाने के लिए संवाद कायम रखने पर ज़ोर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने की पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी, लेकिन सदन की गरिमा बनाए रखना भी अनिवार्य है।
विपक्ष की रणनीतियाँ और बहस के मुद्दे
विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वे इस सत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेंगे। इनमें बेरोजगारी, महंगाई, ग्रामीण विकास योजनाओं के बदलाव, विदेशी नीतियां, और सामाजिक मीडिया पर प्रतिबंध जैसे विषय शामिल बताए जा रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि ये मुद्दे देश के आम नागरिकों की रोज़मर्रा की समस्याओं से जुड़े हैं और बजट सत्र में इनकी गहन बहस होनी चाहिए।
धन्यवाद प्रस्ताव से बजट बहस तक
बजट सत्र के पहले भाग में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी, जिसके लिए सदन ने 2 से 4 फरवरी तक समय निर्धारित किया है। इसके बाद आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा — जो देश की आर्थिक स्थिति का विस्तृत अवलोकन देता है — और फिर बजट पर बहस शुरू होगी।
क्या संसद में लोकतांत्रिक बहस की लहर चलेगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट सत्र में सिर्फ़ वित्तीय नीतियों पर ही नहीं, बल्कि देश के भविष्य-निर्धारण वाले निर्णयों पर भी गहरी बहस देखने को मिल सकती है। ऐसे में संसद की कार्यवाही राजनीतिक रूप से भी काफी सक्रिय रहने की संभावना जताई जा रही है।






