हिमाचल में ‘श्वेत प्रलय’ का कहर: 835 सड़कें बंद, बिजली गुल और अगले 48 घंटे भारी
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संवाद 24 हिमाचल प्रदेश । हिमाचल प्रदेश इस समय भीषण बर्फबारी और मौसमी कहर का सामना कर रहा है, जिसने पूरे राज्य के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बर्फबारी और बारिश के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां 835 प्रमुख सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं और 1000 से अधिक बिजली ट्रांसफार्मर ठप पड़ गए हैं, जिससे कई इलाकों में अंधेरा छा गया है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है, जो संकेत देता है कि आने वाले दिन राज्य के लिए और भी चुनौतियां लेकर आ सकते हैं।
सड़कों पर ब्रेक: बर्फ की मोटी चादर में कैद हुए कई जिले
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) से प्राप्त नवीनतम जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह तक 835 सड़कें बंद पड़ी थीं, जिनमें से अधिकांश शिमला, लाहौल-स्पीति, चंबा, कुल्लू, मंडी और किन्नौर जिलों में हैं। सड़कों के बंद होने से न केवल दैनिक आवागमन बाधित हुआ है, बल्कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें सड़कों को खोलने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास कर रही हैं, लेकिन लगातार हो रही बर्फबारी और फिसलन भरी परिस्थितियां उनके काम में बाधा डाल रही हैं। PWD के प्रमुख अभियंता ने बताया कि सड़कों की बहाली में वक्त लग सकता है, खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जहां बर्फ की मोटी परतें जम गई हैं।
अंधेरे में डूबे गांव: ट्रांसफार्मर हुए ठप, जनजीवन प्रभावित
बिजली आपूर्ति की स्थिति भी चिंताजनक है। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) के अनुसार, 1073 से अधिक बिजली ट्रांसफार्मर खराब हो गए हैं, जिससे हजारों घरों और व्यवसायों में बिजली गुल है। इसका सबसे बुरा असर उन दूरदराज के इलाकों पर पड़ा है जहां ठंड का प्रकोप पहले से ही अधिक है। बिजली के बिना, हीटिंग सिस्टम और संचार उपकरण भी प्रभावित हुए हैं, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विद्युत बोर्ड की टीमें खराब ट्रांसफार्मरों की मरम्मत और आपूर्ति बहाल करने में लगी हैं, लेकिन दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने में उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर बिजली के खंभे और तार भी बर्फबारी के कारण टूट गए हैं, जिनकी मरम्मत में समय लग सकता है।
कुदरत का सफेद जाल: लाहौल-स्पीति और किन्नौर में रिकॉर्ड बर्फबारी
ताजा बर्फबारी के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के कोकसर में सबसे अधिक 45 सेंटीमीटर बर्फबारी दर्ज की गई है। इसके अलावा, किन्नौर के कल्पा में 20 सेंटीमीटर, शिमला के कुफरी में 15 सेंटीमीटर और पर्यटन नगरी मनाली में 10 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई है। राजधानी शिमला में भी हल्की बर्फबारी और बारिश का दौर जारी है, जिससे ठंड का प्रकोप और बढ़ गया है। निचले इलाकों में मूसलाधार बारिश ने सामान्य जीवन को प्रभावित किया है, जिससे नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है और भूस्खलन का खतरा भी पैदा हो गया है।
मौसम विभाग की चेतावनी: अभी टला नहीं है ‘येलो अलर्ट’ का खतरा
मौसम विभाग ने 25 और 26 जनवरी को राज्य के मध्यम और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। 27 और 28 जनवरी को भी अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी की संभावना है। हालांकि, 29 जनवरी से मौसम में कुछ सुधार की उम्मीद है, जब मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है। इस प्रतिकूल मौसम को देखते हुए, प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
पर्यटन पर असर: रोमांच के बीच यात्रा रद करने की मजबूरी
पर्यटन उद्योग पर भी इस बर्फबारी का मिश्रित प्रभाव पड़ा है। जहां एक ओर बर्फ से ढके पहाड़ पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सड़कों के बंद होने और परिवहन की समस्याओं ने कई पर्यटकों को अपनी यात्रा रद्द करने पर मजबूर किया है। होटल व्यवसायी उम्मीद कर रहे हैं कि मौसम में सुधार होते ही पर्यटकों की आमद फिर से बढ़ेगी।
प्रशासनिक मुस्तैदी: राहत और बचाव कार्यों के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश
मुख्यमंत्री ने स्थिति का जायजा लिया है और अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। आपातकालीन सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है और विभिन्न जिलों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है कि प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचे और आवश्यक सेवाएं जल्द से जल्द बहाल हों। आने वाले दिनों में राज्य के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी, लेकिन प्रशासन और जनता मिलकर इस संकट का सामना करने के लिए तैयार हैं।






