77वें गणतंत्र दिवस पर वैश्विक भरोसा: यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व को भारत का न्योता
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत 26 जनवरी 2026 को अपना 77वाँ गणतंत्र दिवस बड़े उत्साह और ऐतिहासिक महत्व के साथ मना रहा है। इस साल का समारोह सिर्फ परंपरा नहीं है, बल्कि कूटनीति, वैश्विक साझेदारी और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक भी है, जिसमें दुनिया भर के सहयोगियों और नेताओं की उपस्थिति देखने को मिली है।
मुख्य अतिथि: यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता
इस वर्ष के गणतंत्र दिवस पर परंपरा से हटकर यूरोपीय संघ के दो बड़े रूढ़ नेता संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि होंगे:
- उर्सुला वॉन डेर लेयेन — यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष
- एंटोनियो कोस्टा — यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष
यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ के उभारते राजनीतिक नेतृत्व को एक साथ भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह में बुलाया गया है, जो भारत-EU के बीच बढ़ती रणनीतिक, आर्थिक और वैश्विक साझेदारी को दर्शाता है।
भारत की कूटनीति और वैश्विक तेज़ी
इन नेताओं के आगमन को भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया जा रहा है। यह न केवल दिखाता है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बातचीत और सहयोग बढ़ रहा है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि दोनों पक्ष महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों और रणनीतिक साझेदारियों की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी के साथ, इस कार्यक्रम में देश-विदेश की कूटनीतिक चर्चाएँ भी मुख्य रेखा बनेंगी, जिससे भारत का वैश्विक प्लेटफॉर्म पर बल और मान्यता और बढ़ेगी।
परेड का भव्य आयोजन
क़र्तव्य पथ पर आयोजित परेड में भारतीय सैन्य शक्ति, तकनीकी उन्नति और सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखेगी। विदित हो कि गणतंत्र दिवस समारोह में परंपरा से ही सैनिक परेड, सांस्कृतिक समूह, भारतीय कला-संस्कृति की झांकियाँ और राष्ट्रीय गीतों के साथ भारतीय मूल्यों का गर्वपूर्ण प्रदर्शन होता है। 2026 का गणतंत्र दिवस सिर्फ महोत्सव में एक स्पष्ट संदेश यह भी बुना गया है कि भारत आर्थिक, रणनीतिक और वैश्विक क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के लिए तैयार है। यूरोपीय संघ जैसे बड़े साझेदार का संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि बनना इस दिशा की एक मजबूत मिसाल माना जा रहा है।






