महू में ज़हरीले जल का कहर: 19 बच्चों समेत 25 लोग बीमार, पानी की आपूर्ति पर गंभीर सवाल
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संवाद 24 मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के महू तहसील मुख्यालय के पत्ती बाजार और आसपास के मोहल्लों में पानी की आपूर्ति से जुड़े एक गंभीर स्वास्थ्य संकट ने स्थानीय जनता और प्रशासन दोनों को चिंतित कर दिया है। पिछले लगभग 10 से 15 दिनों में कुल 25 लोग, जिनमें से 19 बच्चे शामिल हैं, अचानक से पीलिया (जॉन्डिस), टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों से प्रभावित पाए गए हैं — जिनके लक्षण दूषित पानी सेवन से जुड़े प्रतीत हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया है कि नलों से बाहर आने वाला पानी धुंधला, बदबूदार और अस्वाभाविक रूप से गंदा हो चुका है। कई परिवारों ने शिकायत की कि पानी की गुणवत्ता हाल ही में अचानक बिगड़ी है और इस संदिग्ध पानी के सेवन से बच्चों की सेहत सबसे अधिक प्रभावित हुई है।
स्वास्थ्य विभाग में हड़कम्प
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक अबतक रिपोर्ट किए गए मामलों में अधिकांश लोगों को जॉन्डिस या टाइफाइड जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं। बच्चों में इन बीमारियों के कारण स्कूल जाना मुश्किल हो गया है, कई छात्रों ने परीक्षाओं तक में हिस्सा नहीं ले पाया। परिवारों का कहना है कि वे प्रशासन को पहले भी पानी की खराब गुणवत्ता के बारे में सूचना दे चुके थे, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस वजह से कई लोगों का स्वास्थ्य अचानक तेजी से बिगड़ गया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जैसे ही मामले की गंभीरता बढ़ी, इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने देर रात महू का दौरा किया और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें जल्द से जल्द पानी के स्रोत का परीक्षण कर रही हैं और संभावित कारणों की जांच कर रही हैं। अधिकारी यह भी जोड़ रहे हैं कि समस्या का मूल कारण पुरानी या दोषपूर्ण जल आपूर्ति पाइपलाइन और सीवर लाइनों के बीच संभावित लीक होना हो सकता है, जिससे दूषित जल पेयजल नेटवर्क में मिला हो। हालांकि विस्तृत तकनीकी अध्ययन अभी जारी है।
लक्षण, इलाज और फैलाव के खतरे
पीड़ितों में पीलिया (जॉन्डिस), उल्टी, बुखार और पेट रोगों जैसे लक्षण सामान्य रूप से देखे जा रहे हैं, जो स्पष्ट रूप से जलजनित संक्रमण से जुड़े हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित पानी में मौजूद रोगजनक जीवाणु जैसे ई-कोलाई और सैल्मोनेल्ला टाइफाइड और अन्य संक्रमणों को जन्म दे सकते हैं, खासकर बच्चों और कमजोर रोगप्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में। स्थानीय चिकित्सा केंद्रों और अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रभावित लोगों का इलाज शुरू कर दिया है। उनमें से कुछ को अस्पताल में भर्ती भी किया गया है, जबकि अन्य का घरों पर चिकित्सीय निगरानी के तहत इलाज किया जा रहा है।
सावधानी के उपाय और जनता से अपील
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों के निवासियों से आग्रह किया है कि वे केवल उबला हुआ पानी ही पिएं, आवश्यक होने पर फिल्टर या बोतलबंद पानी का उपयोग करें, और किसी भी संदिग्ध लक्षण के तुरंत बाद डॉक्टर से संपर्क करें। सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पानी की गुणवत्ता की जांच, पाइपलाइन निरीक्षण और संभावित दूषण स्रोतों की पहचान जैसे कदम उठाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसे मामले न दोबारा उभरें।
इंदौर संकट की पृष्ठभूमि
यह संकट उस वृहद समस्या के साये में सामने आया है, जब पिछले महीने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की गंभीर दूषण की वजह से कई लोगों की मौतें और हजारों के बीमार होने जैसी घटनाएं सामने आई थीं — जो सम्पूर्ण समुदाय स्वास्थ्य और बुनियादी जल संरचना पर सवाल उठाती हैं।
क्या यह केवल महू की समस्या है
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि अकसर ग्रामीण या शहरी इलाकों में पुरानी पाइपें, अव्यवस्थित सीवर या नालियों के निकट चलने वाले जल नेटवर्क गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकते हैं। यह समस्या न केवल महू या इंदौर तक सीमित है, बल्कि व्यापक जल सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाती है।






