रणभूमि से लेकर बाजार तक, हर तरफ ‘भारत’ का शोर, रक्षा उत्पादन में बना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड।

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संवाद 24 नई दिल्ली। ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना अब एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में दुनिया के सामने है। भारत ने न केवल अपनी सीमाओं को सुरक्षित किया है, बल्कि हथियारों के वैश्विक बाजार में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में अपनी जगह पक्की कर ली है।

ताजा आंकड़ों की गर्जना: 1.54 लाख करोड़ का जादुई सफर
रक्षा मंत्रालय के सबसे हालिया आंकड़ों (जनवरी 2026 तक के अपडेटेड डेटा) के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछले साल के ₹1.27 लाख करोड़ की तुलना में 18 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है।
बड़ी खबर: केंद्र सरकार ने अब 2025-26 के लिए ₹1.75 लाख करोड़ के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। जिस गति से काम चल रहा है, उम्मीद है कि मार्च 2026 तक भारत इस लक्ष्य को भी पीछे छोड़ देगा।

निर्यात में ‘विराट’ छलांग: 100 देशों तक पहुँचा ‘मेड इन इंडिया’
भारत अब केवल अपने लिए हथियार नहीं बना रहा, बल्कि दुनिया की जरूरतें भी पूरी कर रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह पिछले साल की तुलना में 12% की बढ़ोतरी दर्ज करता है। आज भारत अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया जैसे विकसित और उभरते देशों सहित 100 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद बेच रहा है। ‘तेजस’ फाइटर जेट और ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल के बाद अब ‘प्रचंड’ लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर की मांग भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ी है।

प्राइवेट सेक्टर और MSMEs का दम
इस सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है—निजी क्षेत्र की भागीदारी।
रक्षा उत्पादन में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी अब बढ़कर 23% हो गई है।
देश के लगभग 16,000 MSMEs रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
सरकार ने 2025 को ‘Year of Reforms’ (सुधारों का वर्ष) घोषित किया था, जिसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है।

रणनीतिक जीत: आयात पर लगाम
कभी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक रहने वाला भारत अब 65% रक्षा उपकरण अपने देश में ही बना रहा है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स में तेजी से हो रहे निवेश ने विदेशी कंपनियों को भी भारत में कारखाने लगाने पर मजबूर कर दिया है। टाटा-एयरबस का वडोदरा प्लांट (C-295 विमानों के लिए) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

भविष्य का लक्ष्य: मिशन 2029
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत यहीं रुकने वाला नहीं है। सरकार का अगला लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को ₹3 लाख करोड़ और निर्यात को ₹50,000 करोड़ के पार ले जाना है। विश्लेषण के अनुसार, भारत अब ‘सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भरता’ के युग से पूरी तरह बाहर निकल चुका है। यह नया भारत है, जो अपनी रक्षा खुद करता है और दुनिया की रक्षा के लिए हथियार भी उपलब्ध कराता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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