‘नाममात्र जुर्माना?’ इंडिगो पर कार्रवाई को लेकर DGCA पर भड़के पायलट संगठन
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संवाद 24 नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो पर लगाए गए जुर्माने को लेकर एक बार फिर नागरिक उड्डयन क्षेत्र में बहस तेज हो गई है। पायलटों के संगठन ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइन पर लगाया गया दंड यात्रियों की परेशानी और सुरक्षा जोखिमों की तुलना में बेहद कम है।
दिसंबर में क्यों बिगड़ा इंडिगो का संचालन?
पिछले साल दिसंबर के शुरुआती दिनों में इंडिगो के परिचालन में भारी अव्यवस्था देखने को मिली थी। खराब प्लानिंग और संसाधनों की कमी के चलते सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि कई उड़ानें घंटों देरी से चलीं। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ा, जिन्हें एयरपोर्ट पर लंबा इंतजार, कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने और यात्रा योजनाएं बदलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
हजारों उड़ानें प्रभावित, लाखों यात्री परेशान
उड़ानों के रद्द और विलंब होने से देशभर के प्रमुख हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अनुमान के मुताबिक हजारों उड़ानें सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित हुईं, जिससे लाखों यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ी। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की और एयरलाइन की तैयारियों पर सवाल उठाए।
DGCA की जांच और जुर्माने का फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए DGCA ने इंडिगो के परिचालन की विस्तृत जांच की। जांच में सामने आया कि क्रू मैनेजमेंट, बैकअप प्लानिंग और उड़ान ड्यूटी समय सीमा जैसे नियमों के पालन में खामियां थीं। इसके बाद DGCA ने IndiGo पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया और वरिष्ठ प्रबंधन को भविष्य में ऐसी स्थिति न दोहराने की चेतावनी दी।
पायलट संगठन क्यों नाराज़ है?
पायलटों के राष्ट्रीय संगठन Federation of Indian Pilots ने DGCA के इस फैसले को नाकाफी बताया है। संगठन का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर उड़ानों के प्रभावित होने और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के बावजूद जुर्माने की राशि प्रतीकात्मक लगती है। उनका मानना है कि सख्त दंड न होने से एयरलाइनों को गलतियों से सबक लेने का मजबूत संदेश नहीं जाता।
‘यात्रियों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए’
पायलट संगठन ने स्पष्ट कहा कि किसी भी हाल में परिचालन क्षमता बढ़ाने के चक्कर में सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। यदि नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। संगठन ने यह भी मांग की कि DGCA को अपनी निगरानी प्रणाली को और मजबूत करना चाहिए।
विदेशी उदाहरणों से तुलना
पायलटों ने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा कि कई देशों में यात्रियों को भारी असुविधा पहुंचाने पर एयरलाइनों पर बहुत बड़ा जुर्माना लगाया जाता है। उनका तर्क है कि भारत में भी वैश्विक मानकों के अनुरूप कड़े दंड तय किए जाने चाहिए, ताकि यात्रियों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
DGCA की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने DGCA की भूमिका और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियामक संस्था को केवल जुर्माना लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि एयरलाइंस अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं में वास्तविक सुधार करें।
यात्रियों पर क्या पड़ा असर?
उड़ानों की अव्यवस्था से यात्रियों को न सिर्फ आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा। कई लोगों को होटल और वैकल्पिक यात्रा साधनों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। हालांकि एयरलाइन ने रिफंड और वैकल्पिक व्यवस्था का दावा किया, लेकिन यात्रियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर सहायता पर्याप्त नहीं थी।
आगे की राह क्या होगी?
अब सबकी नजर इस बात पर है कि DGCA आगे क्या कदम उठाता है और इंडिगो अपने परिचालन ढांचे में क्या सुधार करता है। पायलट संगठन ने संकेत दिए हैं कि यदि भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन हुआ, तो वे और कड़ा रुख अपना सकते हैं। यह मामला केवल एक एयरलाइन या एक जुर्माने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय विमानन क्षेत्र की कार्यसंस्कृति और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नियामक संस्थाएं कितनी सख्ती दिखाती हैं और क्या वास्तव में यात्रियों का भरोसा बहाल हो पाता है।






