चुनिंदा निशानेबाज़ी पर भारत का कड़ा संदेश: पोलैंड के साथ बैठक में जयशंकर ने रखी दो-टूक बात
Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। भारत–पोलैंड द्विपक्षीय बैठक में आज विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में बढ़ावा देना या उसे पोषण देना भारत और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में शांति व सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने पोलैंड को साफ़ तौर पर आगाह किया कि आतंकवाद “चाहे वह किसी भी रूप में हो” उसे सहयोग देना इन्सानियत और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। जयशंकर की यह टिप्पणी पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ मुलाकात के दौरान आई, जिसमें दोनों देशों ने आतंकवाद, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक साझेदारी पर गहन चर्चा की। भारत के रुख ने यह संकेत दिया कि वह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समन्वय को और मज़बूत करना चाहता है, खासकर उन तत्वों के खिलाफ जो क्षेत्रीय अशांति फैलाते हैं।
चुनिंदा निशानेबाज़ी पर तीखा प्रहार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक में कहा कि किसी देश या क्षेत्र को चुनकर निशाना बनाना और बाकी मामलों में चुप्पी साध लेना अंतरराष्ट्रीय मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को उसके स्रोत और स्वरूप के आधार पर देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार।
आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट और सख्त रुख
जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत अपने पड़ोस में आतंकवाद को किसी भी रूप में बढ़ावा देने का विरोध करता है। उनका कहना था कि अगर कहीं भी आतंकवादी ढांचे को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन मिलता है, तो उसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ता है।
पड़ोसी क्षेत्रों की शांति पर चिंता
भारत ने बैठक में यह भी रेखांकित किया कि दक्षिण एशिया लंबे समय से आतंकवाद से प्रभावित रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस समस्या को गंभीरता से ले और किसी भी तरह की ढील या पक्षपात से बचे।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल
बैठक के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि आतंकवाद से निपटने के लिए देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान, कानूनी सहयोग और संयुक्त रणनीति बेहद जरूरी है। भारत ने कहा कि केवल बयानबाज़ी से नहीं आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने का समय आ गया है।
पोलैंड की प्रतिक्रिया और समझ
पोलैंड की ओर से भी यह संकेत दिया गया कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। दोनों पक्षों ने माना कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए समान दृष्टिकोण और आपसी समझ आवश्यक है।
दोहरे मानदंडों से नुकसान
जयशंकर ने यह भी कहा कि जब कुछ देश आतंकवाद पर सख्ती दिखाते हैं और कुछ मामलों में चुप रहते हैं, तो इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। यह स्थिति आतंकवादी संगठनों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाती है।
भारत–पोलैंड संबंधों में नई ऊर्जा
इस बैठक को भारत–पोलैंड रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई, ताकि संबंध केवल कूटनीतिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक भी बन सकें।
वैश्विक मंच पर भारत का संदेश
भारत ने इस वार्ता के जरिए वैश्विक मंच को साफ संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह की नरमी या भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। भारत का मानना है कि स्थायी शांति तभी संभव है, जब सभी देश एक समान और निष्पक्ष नीति अपनाएं।
भविष्य की दिशा और उम्मीद
बैठक के अंत में यह उम्मीद जताई गई कि भारत और पोलैंड मिलकर न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करेंगे, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और शांति के लिए भी साझा प्रयास करेंगे। यह संवाद आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा दे सकता है।






