इंदौर में पीने के पानी की तबाही: राहुल गांधी ने संसद में मुद्दा उठाने का वादा किया
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संवाद 24 इंदौर। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के इंदौर में पीने के पानी के दूषित होने से फैली गंभीर स्वास्थ्य समस्या पर संसद में मुद्दा उठाने का वादा किया है, साथ ही राज्य सरकार से जवाबदेही और जवाब की मांग को तेज किया है। उन्होंने यह बात पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद में कही, जहां उन्होंने कहा कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से लोग गंभीर रूप से प्रभावित हैं और राज्य सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए — चाहे वह विधानसभा में हो या संसद में। राहुल गांधी ने अपने प्रवास के दौरान कहा कि दूषित पेयजल की समस्या न सिर्फ इंदौर बल्कि कहीं-कहीं पूरे देश में एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुकी है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि राज्य सरकार को विधानसभा में उठाकर जवाब देना चाहिए, जबकि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद स्तर पर भी मजबूती से उठाएगी।
परिवारों से सीधी मुलाकात
राहुल गांधी ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में अस्पतालों में भर्ती मरीजों और दूषित पानी पीने से जान गंवाने वाले लोगों के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावित परिवारों के साथ बैठकर उनकी परेशानियों को सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी आवाज संसद तक पहुँचाई जाएगी। कई परिवारों ने बताया कि उनके घरों में अब भी साफ पानी नहीं पहुँचा है और वे मजबूरन पैसे खर्च करके आरओ का पानी खरीदने को मजबूर हैं। एक पीड़ित महिला ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी को बताया कि उनकी सास की मौत उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों के कारण हुई, जो दूषित पानी की वजह से फैल गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने समय रहते पानी सप्लाई बंद नहीं की, जिससे यह समस्या लोगों के लिए जानलेवा साबित हुई।
सरकार पर आरोप और जवाबदेही की मांग
राहुल गांधी ने कांग्रेस की ओर से यह भी घोषणा की कि पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए उन्हें व्यक्तिगत चेक भी दिए जाएंगे, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि आर्थिक मदद से समस्या का समाधान नहीं होता — मूल समस्या है साफ एवं सुरक्षित पानी की व्यवस्था। उन्होंने कहा कि साफ पानी उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन राज्य सरकार इस जिम्मेदारी में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता का स्वास्थ्य गंभीर संकट में है और सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशील नहीं दिखाई दे रही।
विपक्ष की भूमिका और भविष्य की रणनीति
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी दलों का कार्य ही लोगों के मुद्दों को संसद और विधानसभा दोनों स्तरों पर उठाना है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सरकार को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, खासकर जब लोगों की जान और स्वास्थ्य का सवाल हो। उन्होंने आश्वस्त किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में लगातार उठाएगी और इस मामले में बहस को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी।
सियासी प्रतिक्रियाएं
इस दौरे और राहुल गांधी के बयानों पर सियासी प्रतिक्रियाएं भी जोर पकड़ रही हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तीखी आलोचनाएं की हैं और सवाल उठाए हैं कि आखिर साफ पानी की व्यवस्था विफल क्यों हुई। दूसरी ओर, सत्ताधारी पक्ष के कुछ नेताओं ने राहुल गांधी पर राजनीति करने का आरोप लगाया है, इसे केवल “राजनीतिक ड्रामा” करार दिया है। विशेषज्ञ और स्थानीय नागरिक भी सवाल उठा रहे हैं कि साफ पानी की प्रणाली में दीर्घकालिक सुधार की आवश्यकता है और अस्थायी इंतजाम से मूल समस्या का समाधान नहीं हो सकता। लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी कोई स्वास्थ्य आपदा फिर से न हो।
क्या मिलेगा जनहित में बदलाव?
अब यह देखना है कि संसद और विधानसभा में उठाए गए इस मुद्दे का क्या असर समाज और शासन-व्यवस्था पर पड़ता है। क्या सरकार जवाबदेही तय करेगी और साफ पानी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करेगी? या फिर यह गंभीर सवाल विचारों में ही रह जाएगा? जनता की नजरें अब विपक्ष और सरकार के अगले कदम पर हैं।






