छत्तीसगढ़ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का चक्कर: 74 वर्षीय रिटायर्ड डॉक्टर से 1.28 करोड़ की ठगी
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संवाद 24 छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर ठगों की एक चौंकाने वाली ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें 74 वर्ष के रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर स्वपन कुमार सेन को लगभग 1.28 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का शिकार बनाया गया। आरोपियों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी बताकर विश्वास जीतने के बाद डॉक्टर को दस दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और खर्चीले ट्रांसफर करवा लिए। ये साइबर अपराध उस तरह की धोखाधड़ी का हिस्सा है, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है — जहां अपराधी वीडियो और कॉल के ज़रिए पीड़ित को डराकर, फर्जी जांच और गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ऐंठते हैं।
कैसे हुआ पूरा मामला?
31 दिसंबर को डॉक्टर सेन के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का पुलिस अधिकारी बताया और आरोप लगाया कि उनके खिलाफ क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी से जुड़ा एक गंभीर मामला दर्ज है। आरोपियों ने विश्वास दिलाने के लिए एक नकली FIR भी भेजा था, जिससे वे अपनी बात अधिक भरोसेमंद दिखा सके। फिर क्या था — डर और भ्रम के बीच डॉक्टर सेन ने अपने बैंक खाते और फिक्स्ड डिपॉज़िट की जानकारी उजागर कर दी। इसके बाद ठगों ने अलग-अलग तारीखों पर खाते में बड़े ट्रांसफर करने का दबाव बनाया।
3 जनवरी: करीब ₹34 लाख
13 जनवरी: लगभग ₹39 लाख
16 जनवरी: लगभग ₹55 लाख
टोटल मिलाकर डॉक्टर ने करीब ₹1.28 करोड़ ऑनलाइन ठगों को भेज दिए।
पुलिस की भूमिका और होल्ड की गई रकम
जब डॉक्टर सेन को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने विधानसभा थाना में तत्काल शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और ठगी वाले खातों में से अब तक लगभग ₹55 लाख को फ्रीज़ (होल्ड) करा लिया है। पुलिस ने बताया है कि अज्ञात आरोपियों के खिलाफ साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर आगामी जांच जारी है, ताकि दोषियों तक पहुंचा जा सके और पीड़ित का नुकसान कम से कम किया जा सके।
‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम — खतरनाक और बढ़ता हुआ साइबर अपराध
डिजिटल अरेस्ट स्कैम साइबर ठगों का एक अत्यंत खतरनाक तरीका है, जिसमें वे फर्जी सरकारी अधिकारियों या एजेंसियों के रूप में फोन और वीडियो कॉल करते हैं। इस दौरान वे पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर आपराधिक जांच के दायरे में हैं, और इसलिए उनके पैसे या बैंक डिटेल साझा करना आवश्यक है। इस तरह के साइबर फ्रॉड का शिकार केवल बुजुर्ग ही नहीं बल्कि पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से सक्षम लोग भी हो रहे हैं। देश भर में डिजिटल-आधारित ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो लोगों की जीवन भर की बचत तक को प्रभावित कर रहे हैं।
कैसे बचें डिजिटल ठगी से — कुछ ज़रूरी सुझाव
किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंक डिटेल या ओटीपी साझा न करें, अगर कोई आपको “डिजिटल गिरफ्तारी” की धमकी दे, तो तुरंत कॉल काट दें, संदिग्ध स्थिति में साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें, कभी भी डर के कारण पैसे न भेजें — यह कोई वैध जांच प्रक्रिया नहीं है।






