विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में तमिल संस्कृति, भारत की आत्मा का जीवंत प्रतीक
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संवाद 24 नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित पोंगल उत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिल संस्कृति की ऐतिहासिक गहराई और उसकी निरंतरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह विश्व की सबसे प्राचीन और आज भी जीवंत सभ्यताओं में से एक है। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक आत्मा का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया, जो समय के साथ और अधिक सशक्त होती गई है।
पोंगल: परंपरा, प्रकृति और कृतज्ञता का पर्व
प्रधानमंत्री ने कहा कि पोंगल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य और किसानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि भारतीय जीवन-पद्धति में प्रकृति और मानव के बीच संतुलन को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
तमिल संस्कृति की वैश्विक पहचान
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिल भाषा, साहित्य, संगीत और वास्तुकला ने न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। सदियों पुरानी यह संस्कृति आज भी आधुनिकता के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही है।
इतिहास से भविष्य तक का सांस्कृतिक सेतु
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उन्होंने हाल के वर्षों में तमिल विरासत से जुड़े कई ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लिया है। उनके अनुसार, ऐसे प्रयास इतिहास और वर्तमान के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण करते हैं और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
सतत जीवनशैली का संदेश
प्रधानमंत्री ने तमिल संस्कृति को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली का उदाहरण बताते हुए कहा कि आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब भारतीय परंपराओं से मिली सीख बेहद प्रासंगिक हो जाती है। उन्होंने कहा कि सादा जीवन और प्रकृति के प्रति सम्मान ही स्थायी विकास का मार्ग है।
किसानों की भूमिका को किया नमन
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने देश के किसानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय कृषि व्यवस्था की आत्मा गांवों में बसती है। पोंगल जैसे पर्व किसानों की मेहनत और त्याग को सम्मान देने का माध्यम हैं।
राष्ट्रीय एकता में सांस्कृतिक विविधता की शक्ति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता है। तमिल संस्कृति जैसी प्राचीन परंपराएं पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का काम करती हैं और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूत करती हैं।
समारोह में दिखी परंपरा और आधुनिकता की झलक
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक व्यंजन, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बना दिया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि भारतीय संस्कृति परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से ही आगे बढ़ती है।






