बर्फीली घाटी, गर्म सियासत: शक्सगाम को लेकर क्यों बढ़ी बेचैनी

Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मुद्दा है शक्सगाम घाटी, जिसे लेकर चीन ने हाल के दिनों में अपना दावा दोहराया है। भारत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि शक्सगाम घाटी भारत का अभिन्न हिस्सा है और चीन का कोई भी दावा पूरी तरह अवैध है। यह विवाद केवल नक्शों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी रणनीतिक, ऐतिहासिक और सैन्य अहमियत जुड़ी हुई है।

क्या है शक्सगाम घाटी और कहां स्थित है यह इलाका
शक्सगाम घाटी, जिसे ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहा जाता है, लद्दाख के उत्तर में स्थित है। यह इलाका ऐतिहासिक रूप से जम्मू-कश्मीर का हिस्सा रहा है। भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र दुर्गम, बर्फीला और ऊंचे पर्वतों से घिरा हुआ है, लेकिन सामरिक नजरिए से इसकी स्थिति बेहद संवेदनशील मानी जाती है। यही वजह है कि इस घाटी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिकी रहती हैं।

विवाद की जड़: 1963 का समझौता
शक्सगाम घाटी विवाद की जड़ें वर्ष 1963 तक जाती हैं, जब पाकिस्तान और चीन के बीच एक तथाकथित सीमा समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने अवैध रूप से भारत के इस क्षेत्र को चीन को सौंप दिया। भारत ने तब भी और आज भी इस समझौते को पूरी तरह गैर-कानूनी बताया है, क्योंकि पाकिस्तान को इस क्षेत्र पर कोई वैध अधिकार नहीं था।

चीन के हालिया दावे क्यों बढ़ा रहे चिंता
हाल के वर्षों में चीन ने शक्सगाम घाटी से सटे इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास को तेज किया है। सड़कों, पुलों और सैन्य ढांचों के निर्माण से यह संकेत मिल रहा है कि चीन इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करना चाहता है। भारत का कहना है कि इस तरह की रणनीति न केवल क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ती है, बल्कि सीमा पर तनाव को भी बढ़ावा देती है।

भारत का स्पष्ट और सख्त रुख
भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि शक्सगाम घाटी भारत की संप्रभुता का हिस्सा है और इस पर किसी भी प्रकार का विदेशी दावा स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान-चीन के बीच हुआ कोई भी समझौता भारत के लिए मान्य नहीं हो सकता। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाता रहा है।

रणनीतिक महत्व क्यों है इतना ज्यादा
शक्सगाम घाटी का महत्व केवल भू-भाग तक सीमित नहीं है। यह इलाका चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के नजदीक स्थित है, जिससे इसकी रणनीतिक उपयोगिता और बढ़ जाती है। इसके अलावा, यह क्षेत्र एशिया की कुछ सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है, जो सैन्य और निगरानी के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती हैं।

आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में शक्सगाम घाटी को लेकर कूटनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है। हालांकि भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि चीन इस पर क्या रुख अपनाता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया कैसी रहती है। शक्सगाम घाटी विवाद एक बार फिर यह साबित करता है कि भारत-चीन संबंधों में सीमा मुद्दा सबसे संवेदनशील और जटिल पहलू बना हुआ है। इतिहास, भूगोल और रणनीति—तीनों मिलकर इस विवाद को और गंभीर बनाते हैं। भारत का स्पष्ट संदेश है कि उसकी जमीन पर किसी भी प्रकार का बाहरी दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News