अनिल अंबानी को मिली राहत पर बैंकों की आपत्ति, बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर की अपील
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संवाद 24 नई दिल्ली। कर्ज संकट से जूझ रहे उद्योगपति Anil Ambani को बॉम्बे हाई कोर्ट से मिली अंतरिम राहत के खिलाफ तीन बैंकों ने अदालत का रुख किया है। बैंकों ने हाई कोर्ट की एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दायर की है।
मामला वर्ष 2020 में तैयार की गई एक फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट (FAR) से जुड़ा है, जिसके आधार पर बैंकों ने अनिल अंबानी से जुड़े खातों पर कार्रवाई शुरू की थी। पिछले महीने हाई कोर्ट की एकल पीठ ने बैंकों को इस रिपोर्ट के आधार पर किसी भी तरह की कार्रवाई से रोक दिया था।
अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि यह फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट Reserve Bank of India द्वारा 2024 में जारी ‘व्यावसायिक बैंकों में धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन’ संबंधी मास्टर डायरेक्शन का उल्लंघन करती है। कोर्ट ने माना था कि पुराने निर्देशों के तहत तैयार की गई रिपोर्ट नए नियामकीय ढांचे के अनुरूप नहीं है।
बैंकों की दलील
अपील की सुनवाई के दौरान बैंकों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने डिवीजन बेंच से कहा कि यदि एकल पीठ के आदेश पर रोक नहीं लगाई गई तो इसके गंभीर और दूरगामी परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में फंड के दुरुपयोग और कथित गबन से जुड़े निष्कर्ष दर्ज हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
मेहता ने यह भी दलील दी कि एकल पीठ द्वारा दिए गए कुछ निष्कर्ष अनिल अंबानी की याचिका या अंतरिम राहत की सुनवाई के दौरान उठाए गए तर्कों से मेल नहीं खाते। बैंकों का कहना है कि यह ऑडिट 2016 के RBI सर्कुलर के तहत कराई गई थी और उस समय लागू नियमों का पूरी तरह पालन किया गया था।
अनिल अंबानी का पक्ष
अनिल अंबानी की ओर से पहले यह तर्क दिया गया था कि RBI की 2024 की मास्टर डायरेक्शन प्रभावी रूप से 2016 के पुराने निर्देशों को निरस्त करती हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि फोरेंसिक ऑडिट के लिए नियुक्त बाहरी ऑडिटर को कंपनी अधिनियम के तहत वैधानिक ऑडिटर होना चाहिए, जो इस मामले में नहीं था।
बैंकों ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि अंबानी ने कभी भी फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट को उसके तथ्यों और निष्कर्षों के आधार पर सीधे चुनौती नहीं दी। मामले पर बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में आगे की सुनवाई की जाएगी।






