NSA हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस: सोनम वांगचुक की पत्नी ने 4 वीडियो छिपाने का आरोप लगाया
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संवाद 24 नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिए गए जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हिरासत प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए। वांगचुक की पत्नी Geetanjali J Angmo ने अदालत में दलील दी कि उनके पति को हिरासत में लेने वाले अधिकारियों ने विवेक का प्रयोग नहीं किया और अप्रासंगिक सामग्री के आधार पर कठोर कदम उठाया गया।
गीतांजलि की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ के समक्ष कहा कि जिन चार वीडियो को हिरासत का आधार बताया गया है, वे वांगचुक को कभी उपलब्ध ही नहीं कराए गए। उन्होंने इसे प्रभावी प्रतिनिधित्व के संवैधानिक अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन बताया।
सिब्बल ने अदालत को बताया कि जिलाधिकारी ने हिरासत की सिफारिश करते समय स्वतंत्र रूप से विचार नहीं किया और लद्दाख के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट को बिना किसी समीक्षा के आगे बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि हिरासत आदेश में जिन तथ्यों का हवाला दिया गया है, उनका आदेश से सीधा और तार्किक संबंध नहीं है तथा अप्रासंगिक सामग्री को आधार बनाया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि वांगचुक को हिरासत के “पूर्ण आधार” की जानकारी नहीं दी गई, जिससे वे सलाहकार बोर्ड और सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से अपना पक्ष नहीं रख सके।
हिंसा भड़काने के आरोपों पर आपत्ति
सुनवाई के दौरान गीतांजलि जे. आंगमो ने अदालत को बताया कि लेह में उनके पति द्वारा दिया गया भाषण हिंसा को उकसाने के लिए नहीं, बल्कि स्थिति को शांत करने के उद्देश्य से था। उन्होंने कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर वांगचुक को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की जा रही है।
NSA के तहत हिरासत का मामला
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद की गई थी। इन घटनाओं में चार लोगों की मौत और करीब 90 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई थी। प्रशासन ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।
लेह के जिलाधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में कहा है कि वांगचुक की गतिविधियां राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और आवश्यक सेवाओं के रखरखाव के लिए हानिकारक थीं। उन्होंने आरोपों को खारिज किया कि हिरासत अवैध है या वांगचुक के साथ हिरासत में अनुचित व्यवहार किया जा रहा है।
पत्नी का दावा
अपनी याचिका में गीतांजलि जे. आंगमो ने कहा है कि 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा के लिए वांगचुक के किसी बयान या कृत्य को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक ने सोशल मीडिया के माध्यम से हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि ऐसी घटनाएं लद्दाख में वर्षों से चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को नुकसान पहुंचाती हैं।






