समुद्र की नई शतरंज: भारत का $8 अरब सबमरीन प्रोजेक्ट और चीन-पाक गठजोड़ की चुनौती

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संवाद 24 नई दिल्ली।भारत ने समुद्री सुरक्षा को लेकर एक नया रणनीतिक कदम उठाया है, जो न सिर्फ भारतीय नौसेना की ताकत को बढ़ाएगा बल्कि दक्षिण एशियाई पैनापित्र में चीन और पाकिस्तान को एक नया संदेश भी देगा। भारत का $8 अरब (लगभग ₹70,000 करोड़) का अत्याधुनिक पनडुब्बी उन्नयन योजना — प्रोजेक्ट-75I — अब न केवल नौसैनिक क्षमता बढ़ाने का साधन है बल्कि चीन-पाकिस्तान के समुद्री गठजोड़ के बीच भारत की श्रेष्ठता बनाए रखने का अभ्यास भी बन गया है।

क्या है प्रोजेक्ट-75I?
प्रोजेक्ट-75I भारत की सबसे बड़ी नौसैनिक खरीद योजनाओं में से एक है, जिसमें छह अत्याधुनिक पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है। ये पनडुब्बियां विशेष रूप से एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) प्रणाली से लैस होंगी, जिससे वे लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं और पारंपरिक पनडुब्बियों की तुलना में अधिक स्टील्थ क्षमता प्रदान कर सकती हैं। इन पनडुब्बियों की तकनीक भारतीय शिपयार्ड में विकसित व निर्मित की जाएगी, जिससे “मेक इन इंडिया” पहल को भी मजबूती मिलेगी। इस परियोजना का महत्व सिर्फ तकनीकी नहीं है, यह भारतीय नौसेना के रडार के नीचे समुद्र में सक्रियता, सुनने-देखने और जवाबी क्षमता को भी नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।

समुद्री समीकरण में बदलाव
पिछले कुछ महीनों में चीन और पाकिस्तान ने नौसैनिक स्तर पर अपने गठजोड़ को मजबूत किया है। चीन पाकिस्तान को हैंगोर-क्लास पनडुब्बियों का एक बड़ा बेड़ा सौंप रहा है, जो डीजल-इलेक्ट्रिक हैं और AIP तकनीक से लैस हैं — जिससे पाकिस्तान की क्षमता भी बढ़ेगी। इन पनडुब्बियों का पहला बैच पहले ही दौड़ में है और 2028 तक पूरा बेड़ा पाक नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये पनडुब्बियां हिंद महासागर और अरब सागर में पाकिस्तान की समुद्री उपस्थिति को बढ़ा सकती हैं और भारत के लिए सामरिक चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकती हैं, खासकर जब चीन लगातार अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है।

भारत की जवाबी रणनीति
भारतीय नौसेना ने भी समुद्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं। प्रोजेक्ट-75I का लक्ष्य न केवल शक्तिशाली पनडुब्बियों का बेड़ा तैयार करना है, बल्कि भारतीय नौसेना को आने वाले वर्षों में समुद्री संतुलन बनाए रखने के लिए सक्षम बनाना भी है। इसके अलावा, यह योजना भारतीय रक्षा उद्योग और शिपबिल्डिंग सेक्टर को उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता भी देगी। भारत के पास पहले से ही एक मजबूत नौसैनिक ढांचा मौजूद है जिसमें आधुनिक पनडुब्बियां, एंटी-सबमरीन विमान और हेलीकॉप्टर शामिल हैं। ऐसे में प्रोजेक्ट-75I एक नए चरण की शुरुआत है जो समुद्री रणनीति को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप ढालने में सहायक होगा।

क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन
इस बड़े निवेश की पृष्ठभूमि में एक व्यापक भूराजनीतिक तस्वीर भी है — भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच समुद्री प्रभुत्व की दौड़। चीन अपने डीजल-इलेक्ट्रिक और परमाणु पनडुब्बियों के साथ हिंद महासागर क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा रहा है, जबकि पाकिस्तान अपनी नौसेना को मजबूत करने के लिए चीन-निर्मित पनडुब्बियां प्राप्त कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि AIP पनडुब्बियों का बढ़ता उपयोग दक्षिण एशिया में जल सुरक्षा रणनीति को बदल सकता है और समुद्री क्षेत्रों में India’s Anti-Access/Area Denial (A2/AD) क्षमताएँ भी प्रभावित हो सकती हैं।

भविष्य की तैयारियाँ
इन सारी तैयारियों का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत समुद्री सीमाओं पर किसी भी उभरती चुनौती का सामना आत्म-निर्भरता, तकनीकी श्रेष्ठता और रणनीतिक सोच से कर सके। प्रोजेक्ट-75I न केवल नौसैनिक शक्ति को बढ़ाता है बल्कि यह भारत के समुद्री दायित्वों को भी सुदृढ़ बनाता है — चाहे वो सुरक्षा हो, ख़ुफ़िया निगरानी हो या सामरिक संतुलन बनाए रखना।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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