धार्मिक जलापूर्ति बनी त्रासदी: इंदौर में दूषित पानी से मौतों का दर्दनाक आंकड़ा 22 तक पहुंचा
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संवाद 24 इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा इलाका एक बार फिर ख़बरों में तब आया जब दूषित पेयजल से एक और मौत दर्ज हुई, जिससे कुल मौतों की संख्या 22 तक पहुंच गई। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दूषित पानी से फैलने वाली बीमारी ने कई परिवारों के जीवन उजड़ दिए हैं, और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
कैसे हुआ यह भयावह फैलाव?
पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारी मानते हैं कि शहर की मुख्य जल लाइन में कहीं पर सीवेज (नाली का पानी) और पीने के पानी की लाइन मिल गई, जिसके चलते भयंकर बैक्टीरिया और रोगाणु पीने के पानी तक पहुंच गए। इससे लोगों में उल्टी, डायरिया, पेट दर्द, बुखार जैसी गंभीर बीमारियाँ फैल गईं और कई की मौत भी इसी वजह से हुई। विशेषकर भागीरथपुरा इलाके के निवासी पहले से ही शिकायत कर रहे थे कि पानी में गंध, अजीब स्वाद और रंग बदलने जैसे संकेत दिखाई दे रहे हैं, लेकिन शिकायत के बावजूद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
अस्पतालों में बढ़ती भीड़, स्वास्थ्य संकट गहरा
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि दूषित पानी के कारण दर्जनों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, कुछ की हालत बेहद गंभीर है। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे मामलों में संक्रमण पेट तक सीमित नहीं रहकर शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है, जैसा कि कुछ मरीजों में तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएँ भी देखी गई हैं। कई परिवारों ने आरोप लगाया कि रोग नियंत्रण प्रक्रिया में देरी और प्रशासन की उदासीनता के कारण यह स्थिति और गंभीर हो गई। इस बीच, स्वास्थ्य विभाग रोज़ाना पानी के नमूनों की जांच कर रहा है और आवश्यक दवाइयाँ व उपचार निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
राजनीतिक व सामाजिक प्रतिक्रिया
इस त्रासदी ने राजनीतिक गलियारों में भी भारी प्रतिक्रिया जगाई है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने केंद्र तथा राज्य सरकार पर कड़ी आलोचना की है और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई और जल सुरक्षा को लेकर वर्षों से चेतावनी दी जा रही थी, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने का ऐलान किया है, साथ ही दोषियों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि प्रभावित परिवारों का कहना है कि जीवन भर का दुःख मुआवजे से नहीं मिटेगा।
भविष्य की तैयारियाँ और सुधार की दिशा
मध्य प्रदेश सरकार ने अब पानी की आपूर्ति और निगरानी प्रणाली में व्यापक सुधार के कदम उठाने का निर्णय लिया है। इसके तहत रोबोटिक तकनीक और जीआईएस मैपिंग का इस्तेमाल कर पाइपलाइनों की नियमित जाँच और लीकेज की पहचान की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्दशा दोबारा न हो। वहीं भारत के अन्य शहरों में भी जल आपूर्ति की सुरक्षा पर कड़ी निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि कहीं और इस प्रकार का संकट न उठ खड़ा हो।






