भारत में जर्मन चांसलर मेर्ज का ऐतिहासिक दौरा: व्यापार, रक्षा और तकनीक में नए अवसरों की उम्मीद
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संवाद 24 दिल्ली। जर्मन चांसलर फ्रिडरिक मेर्ज सोमवार सुबह अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे। उनका स्वागत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। यह दौरा मेर्ज का चांसलर के रूप में पहला भारत दौरा है और दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने के लिए इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
चांसलर मेर्ज की यह यात्रा दो दिनों के लिए (12‑13 जनवरी) निर्धारित है। अहमदाबाद में दोनों नेता गहन बातचीत करेंगे, जिसमें व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग के मुद्दे प्रमुख होंगे। यह दौरा नाटो और यूरोपीय संघ के बाहर उनका पहला द्विपक्षीय दौरा है, जिससे भारत‑जर्मनी संबंधों में नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग
दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। इस दौरे के दौरान मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और निवेश के अवसरों पर चर्चा होने की संभावना है। मेर्ज के साथ उनकी टीम में कई बड़े कारोबारी भी मौजूद हैं, जो भारत में निवेश और व्यापार के नए अवसर तलाशेंगे।
तकनीक, स्टार्टअप और शिक्षा
इस दौरे का एक मुख्य उद्देश्य हाई‑टेक, हरित ऊर्जा और स्टार्टअप सहयोग है। दोनों देश शिक्षा और कौशल विकास पर भी जोर देंगे। जर्मन कंपनियों को भारतीय युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
डिफेंस क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार दोनों देश पनडुब्बी उत्पादन और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। यह भारत के रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाला कदम हो सकता है।
सांस्कृतिक और राजनयिक कार्यक्रम
मेर्ज के दौरे में केवल कूटनीति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल हैं। वे साबरमती आश्रम जाएंगे और स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। यह कदम दोनों देशों के बीच लोग‑से‑लोग संपर्क और मित्रता को मजबूती देगा।
बेंगलुरु दौरा और नवाचार केंद्र
अहमदाबाद के बाद चांसलर मेर्ज बेंगलुरु भी जाएंगे। वहां वे भारत के तकनीकी और नवाचार हब का दौरा करेंगे और जर्मन कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग पर चर्चा करेंगे। इससे भारत‑जर्मनी तकनीकी साझेदारी और भी मजबूत होने की उम्मीद है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महत्व
यह दौरा वैश्विक भू‑राजनीति और आर्थिक चुनौतियों के बीच हो रहा है। भारत और जर्मनी दोनों अपने सामरिक और आर्थिक हितों को संतुलित करना चाहते हैं। भारत यूरोप के साथ निकट सहयोग चाहता है, जबकि जर्मनी भारत को एशिया में एक मजबूत भागीदार के रूप में देख रहा है।






