नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम पर कांग्रेस का तीखा वार, जयराम रमेश बोले, ‘कागजों में सिमट गया स्वच्छ हवा का वादा’

Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार का महत्वाकांक्षी नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम अब ज़मीन पर असर दिखाने में विफल रहा है और यह महज़ एक “नोशनल” यानी कागजी योजना बनकर रह गया है।

रविवार को जारी बयान में जयराम रमेश ने सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के हालिया विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि भारत में खराब वायु गुणवत्ता अब एक संरचनात्मक संकट का रूप ले चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस गंभीर समस्या पर सरकार की प्रतिक्रिया न तो पर्याप्त है और न ही प्रभावी।

CREA के सैटेलाइट डेटा आधारित अध्ययन के अनुसार, देश के लगभग 44 प्रतिशत शहर लगातार गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। विश्लेषण में शामिल 4,041 नगरों में से 1,787 शहरों में बीते पांच वर्षों के दौरान PM2.5 का औसत स्तर लगातार राष्ट्रीय मानकों से ऊपर दर्ज किया गया। कांग्रेस का कहना है कि ये आंकड़े सरकार के दावों की पोल खोलते हैं।

जयराम रमेश ने कहा कि अब सबसे पहला कदम यह होना चाहिए कि सरकार यह स्वीकार करे कि देश के बड़े हिस्से में वायु प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। उन्होंने 1981 के एयर पॉल्यूशन (कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) एक्ट और 2009 में लागू राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों की व्यापक समीक्षा और सुधार की मांग की।

कांग्रेस ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस आर्थिक और कानूनी कदम उठाने पर भी जोर दिया। पार्टी की मांग है कि एनसीएपी के तहत आवंटित फंड को बढ़ाकर कम से कम 25 हजार करोड़ रुपये किया जाए और इस कार्यक्रम का दायरा देश के सबसे अधिक प्रदूषित 1,000 शहरों और कस्बों तक बढ़ाया जाए। साथ ही, योजना की सफलता का पैमाना PM2.5 के स्तर में वास्तविक कमी को बनाया जाए।

जयराम रमेश ने कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने मांग की कि तय वायु प्रदूषण मानकों को तुरंत लागू किया जाए और वर्ष 2026 के अंत तक सभी संयंत्रों में फ्लू गैस डी-सलफराइजर अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। इसके अलावा, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की स्वतंत्रता बहाल करने और बीते एक दशक में किए गए कथित जन-विरोधी पर्यावरण कानून संशोधनों को वापस लेने की भी मांग की गई।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार ने संसद में दो बार वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों को कमतर दिखाने की कोशिश की है। उनके अनुसार, सरकार सच्चाई से अनजान नहीं है, बल्कि अपनी नाकामी और लापरवाही को छिपाने का प्रयास कर रही है।

Samvad 24 Office
Samvad 24 Office

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News