रथ यात्रा में आस्था पर हमला! बेंगलुरु में पत्थरबाजी से मचा बवाल, सड़क पर उतरे श्रद्धालु, पुलिस ने संभाला मोर्चा
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संवाद 24 डेस्क। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से सामने आई एक गंभीर और संवेदनशील घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब श्रद्धालुओं के जुलूस पर अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस अप्रत्याशित घटना से यात्रा में शामिल लोगों में भय और आक्रोश फैल गया, वहीं माहौल तनावपूर्ण हो गया। घटना के बाद नाराज श्रद्धालुओं ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।रथ यात्रा, जो कि श्रद्धा, भक्ति और सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है, उसी यात्रा पर हुए इस हमले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यात्रा जैसे ही एक विशेष इलाके से गुजर रही थी, तभी ऊपर से पत्थर फेंके जाने लगे। अचानक हुए इस हमले से महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग श्रद्धालु घबरा गए। कुछ लोगों को मामूली चोटें भी आईं, हालांकि पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए किसी बड़े हादसे को टाल दिया।
कैसे बिगड़ा माहौल?
जानकारी के मुताबिक, भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा पूरी धार्मिक विधि-विधान और शांति के साथ आगे बढ़ रही थी। भक्त ढोल, नगाड़ों के साथ भजन, कीर्तन करते हुए रथ को खींच रहे थे। इसी दौरान यात्रा जैसे ही एक संवेदनशील इलाके में पहुंची, वहां मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने ऊपर से पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। अचानक हुए इस हमले से यात्रा में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।श्रद्धालुओं का कहना है कि पत्थरबाजी पहले से सुनियोजित लग रही थी। कई लोगों ने आरोप लगाया कि यात्रा के मार्ग पर पहले से ही संदिग्ध गतिविधियां देखी जा रही थीं, लेकिन समय रहते कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई।
श्रद्धालुओं का फूटा गुस्सा
घटना के बाद श्रद्धालुओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने लगे। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को और गंभीर होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पुलिस बल पर्याप्त संख्या में मौजूद होता, तो ऐसी घटना को रोका जा सकता था।प्रदर्शन के दौरान धर्मिक आस्था पर हमला बर्दाश्त नहीं जैसे नारे भी लगाए गए। कुछ समय के लिए यातायात भी बाधित रहा, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस ने संभाली स्थिति
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर इलाके को घेर लिया गया और हालात पर काबू पाया गया। पुलिस ने तुरंत पत्थरबाजी करने वालों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो व प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। शुरुआती जांच में कुछ संदिग्धों को हिरासत में भी लिया गया है।
प्रशासन का बयान
स्थानीय प्रशासन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसे आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इलाके में शांति व्यवस्था बनी हुई है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा को लेकर सरकार की लापरवाही सामने आई है।वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा माहौल खराब करने की कोशिश की गई है, जिसे किसी भी सूरत में सफल नहीं होने दिया जाएगा।
धार्मिक सौहार्द पर सवाल
बेंगलुरु जैसे महानगर में इस तरह की घटना ने धार्मिक सौहार्द को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी मानी जाती है। ऐसे में इस पर हमला होना समाज के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है।बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी तरह की हिंसा से केवल समाज को नुकसान होता है। उन्होंने प्रशासन से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह पहला मौका नहीं है जब किसी धार्मिक यात्रा के दौरान हिंसा की घटना सामने आई हो। देश के विभिन्न हिस्सों में पहले भी जुलूसों और यात्राओं पर हमले की खबरें आती रही हैं। हर बार सवाल यही उठता है कि आखिर धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा को लेकर स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा।विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील इलाकों में आयोजनों से पहले व्यापक सुरक्षा प्लान और स्थानीय स्तर पर संवाद बेहद जरूरी है।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है। साथ ही, धार्मिक आयोजनों के लिए नए सुरक्षा दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और भविष्य में उनकी आस्था पर इस तरह का हमला दोबारा नहीं होगा।






