डिजिटल अरेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: सिम नियम होंगे कड़े, बैंक-टेलीकॉम की लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही
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संवाद 24 नई दिल्ली। डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सख्त रुख अपनाया है। गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति ने शीर्ष अदालत को सौंपी अपनी स्टेटस रिपोर्ट में साफ कहा है कि यदि बैंकों या टेलीकॉम कंपनियों की लापरवाही से किसी पीड़ित को नुकसान होता है, तो उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित गृह मंत्रालय की इंटरनल हाई-लेवल कमिटी ने डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी को रोकने के लिए सिम कार्ड जारी करने के नियमों को और कड़ा करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा सिस्टम में खामियों के कारण फर्जी सिम और बैंकिंग चूक से अपराधियों को फायदा मिल रहा है।
समिति की भूमिका और अगली सुनवाई
गृह मंत्रालय ने अदालत को बताया कि यह समिति विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में काम कर रही है। समिति की बैठक हर दो सप्ताह में होगी और इसमें अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि भी शामिल रहेंगे। मंत्रालय ने आगे विस्तृत सुझाव देने के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक महीने का समय मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को निर्धारित है।
मुआवजे की व्यवस्था पर भी मंथन
समिति ने डिजिटल अरेस्ट के पीड़ितों को मुआवजा देने से जुड़ी सिफारिशों पर भी चर्चा की। बैठक में यह सहमति बनी कि सिस्टम फेल्योर या संस्थागत लापरवाही के कारण पीड़ितों को नुकसान नहीं उठाना चाहिए। मौजूदा मुआवजा तंत्र की समीक्षा कर उसमें सुधार और बदलाव के निर्देश दिए गए हैं।
एक तय सीमा के बाद CBI करेगी जांच
रिपोर्ट में बताया गया कि डिजिटल अरेस्ट मामलों में एक मौद्रिक सीमा (थ्रेशहोल्ड) तय करने का सुझाव दिया गया है। इस सीमा से ऊपर के मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी, जबकि इससे नीचे के मामलों को राज्य एजेंसियां गृह मंत्रालय के सहयोग से देख सकती हैं।
सिम कार्ड फर्जीवाड़े पर कसा जाएगा शिकंजा
बैठक में रिजर्व बैंक ने जानकारी दी कि बैंकों को फ्रॉड डिटेक्शन के लिए एआई-आधारित टूल्स के इस्तेमाल को लेकर परामर्श जारी किया गया है। संदिग्ध लेनदेन वाले खातों को तुरंत फ्रीज करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत नए ड्राफ्ट नियम तैयार किए जा चुके हैं और हितधारकों से परामर्श जारी है। ये नियम लागू होने के बाद एक व्यक्ति को कई सिम जारी करने, फर्जी दस्तावेजों से सिम लेने और टेलीकॉम कंपनियों की लापरवाही जैसी समस्याओं पर सख्ती से कार्रवाई संभव होगी।
साइबर अपराध से निपटने की तैयारी
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने बताया कि तत्काल खाता फ्रीजिंग, डी-फ्रीजिंग, धन की वसूली और पीड़ितों को राशि लौटाने से जुड़ी SOPs पर भी काम चल रहा है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन के पुनर्गठन पर भी विचार किया जा रहा है।
डिजिटल अरेस्ट मामलों में सरकार की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि आने वाले समय में साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए बैंकिंग और टेलीकॉम सेक्टर की जिम्मेदारी तय की जाएगी और नियमों को और कठोर बनाया जाएगा।






