सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जो वाहन पब्लिक रोड पर नहीं चलेगा, उस पर नहीं लगेगा रोड टैक्स
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संवाद 24 डेस्क। खदानों, फैक्ट्रियों और कंस्ट्रक्शन साइट्स में इस्तेमाल होने वाले भारी औद्योगिक वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जो वाहन अपने पूरे जीवनकाल में सार्वजनिक सड़कों पर नहीं चलते, उन पर रोड टैक्स नहीं लगाया जा सकता। इस फैसले से देश की बड़ी माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।
किन कंपनियों को मिला फायदा
इस फैसले का सीधा लाभ कोल इंडिया, सेल, टाटा स्टील, एलएंडटी, एसीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसी कंपनियों को मिलेगा, जहां बड़ी संख्या में डंपर, एक्सकेवेटर और सरफेस माइनर जैसे वाहन केवल बंद परिसरों में ही उपयोग होते हैं।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
जस्टिस पंकज मित्तल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि फैक्ट्री, खदान या कंस्ट्रक्शन साइट के भीतर चलने वाली हैवी इंडस्ट्रियल और कंस्ट्रक्शन मशीनरी को मोटर व्हीकल की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। ऐसे वाहन सार्वजनिक सड़कों के लिए डिज़ाइन ही नहीं किए जाते, इसलिए उन पर मोटर व्हीकल टैक्स या रोड टैक्स लागू नहीं होगा।
हाई कोर्ट का फैसला पलटा
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के जरिए वर्ष 2011 में गुजरात हाई कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट पर रोड टैक्स लगाने की अनुमति दी गई थी। यह मामला अल्ट्राटेक सीमेंट की अपील पर शीर्ष अदालत पहुंचा था।
संविधान का हवाला
अदालत ने अपने फैसले में संविधान की सातवीं अनुसूची का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों को केवल उन्हीं वाहनों पर टैक्स लगाने का अधिकार है, जो सार्वजनिक सड़कों पर चलते हैं। बंद परिसरों में सीमित उपयोग वाले वाहन इस दायरे में नहीं आते।
एक शर्त भी साफ
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि ऐसे वाहन कभी सार्वजनिक सड़क पर चलते पाए जाते हैं, तो उन पर न सिर्फ रोड टैक्स लगेगा, बल्कि जुर्माना भी वसूला जाएगा।
उद्योग जगत के लिए राहत
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उद्योगों की लागत कम करेगा और माइनिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई राहत देगा। साथ ही, यह निर्णय राज्यों और कंपनियों के बीच लंबे समय से चल रहे टैक्स विवादों को भी काफी हद तक खत्म करने वाला माना जा रहा है।
यह फैसला आने वाले समय में देशभर में औद्योगिक और कंस्ट्रक्शन वाहनों से जुड़े टैक्स नियमों की दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।






