सुप्रीम कोर्ट ने BLOs को बड़ी राहत दी
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संवाद 24 संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) पर चल रहे भारी दबाव को देखते हुए राज्यों को निर्देश दिया कि जो BLO मानसिक या शारीरिक रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का काम करने में सक्षम नहीं हैं, उनकी जगह दूसरे कर्मचारियों को नियुक्त किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के ये निर्देश 9 राज्यों में जारी SIR प्रक्रिया के बीच आए हैं, जहां कई BLOs की मौत और काम के अत्यधिक दबाव की खबरें सामने आ चुकी हैं।
तमिलनाडु की पार्टी TVK ने याचिका दायर कर BLOs पर बढ़ते बोझ, मानसिक तनाव और दो राज्यों में उनके खिलाफ केस दर्ज होने जैसे मुद्दे उठाए थे। याचिका में यह भी कहा गया कि काम के दबाव के चलते कई BLOs ने आत्महत्या तक की है।
SC का स्पष्ट निर्देश— ड्यूटी तय करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी
कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग यह तय नहीं कर सकता कि BLO का काम कौन करेगा। राज्य सरकारें सुनिश्चित करें—
- जिन कर्मचारियों को BLO बनाया गया है, वे यह कार्य करने के लिए फिट हों।
- गर्भवती महिलाएं, गंभीर रूप से बीमार कर्मचारी या असमर्थ व्यक्ति BLO की जिम्मेदारी से मुक्त किए जाएं।
- यदि कोई कर्मचारी SIR का काम नहीं कर पा रहा, तो उसकी जगह दूसरा BLO लगाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को दूसरे राज्यों में नहीं भेजा जा रहा, बल्कि राज्य के भीतर ही BLO ड्यूटी सौंपी जा रही है, इसलिए राज्यों को सुविधानुसार बदलाव करने का अधिकार है।
9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा SIR
27 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने SIR की शुरुआत की थी। यह प्रक्रिया यहां चल रही है:
- राज्य: यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, गोवा, गुजरात
- केंद्र शासित प्रदेश: पुडुचेरी, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार
BLOs को दिसंबर तक घर-घर जाकर फॉर्म भरवाना, जमा करवाना और उन्हें डिजिटल रूप से अपलोड करना है।
अब प्रक्रिया की समय सीमा 7 दिन बढ़ाई जा चुकी है।
उत्पीड़न की शिकायतें और BLOs की परेशानियां
राज्यों के BLOs का कहना है—
- इस बार उन्हें उनकी ड्यूटी वाली जगह से 8–10 किमी दूर भेजा गया है, जिससे सर्वे कठिन हो गया है।
- कई ग्रामीण इलाकों में लोग फॉर्म भरने में सक्षम नहीं होते, ऐसे में पूरा विवरण BLOs को ही भरना पड़ता है।
- फॉर्म अक्सर गंदे या क्षतिग्रस्त मिलते हैं, जिससे स्कैन कर अपलोड करने में मुश्किल आती है।
इसके अलावा, 2003 की वोटर लिस्ट को 2025 की नई लिस्ट से मिलान करना, नए मतदाताओं की जांच और घर-घर दस्तावेज सत्यापन जैसे कार्यों ने उनका बोझ और बढ़ा दिया है।






