सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: देश की सभी प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटीज का होगा ऑडिट,
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संवाद 24 दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटीज का विस्तृत ऑडिट कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और UGC को निर्देश दिया है कि हर यूनिवर्सिटी से जुड़ी जानकारी—स्थापना, संचालन, नियमन, फंडिंग और नॉन-प्रॉफिट स्टेटस—सब कुछ हलफनामे पर हस्ताक्षर कर पेश किया जाए।
कोर्ट ने चेतावनी दी है कि इस काम की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों को ही लेनी होगी। गलत या अधूरी जानकारी देने पर कड़ी कार्रवाई होगी। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2025 को होगी।
कैसे शुरू हुआ विवाद? छात्रा ने लगाया ‘मुस्लिम नाम’ से भेदभाव का आरोप
एमिटी यूनिवर्सिटी की 23 वर्षीय MBA स्टूडेंट आयशा जैन (पहले नाम—खुशी जैन) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
2021 में उन्होंने कानूनी प्रक्रिया अपना कर अपना नाम बदल लिया था और सभी दस्तावेज—आधार, गजट आदि—अपडेट भी हो चुके थे।
एमिटी ने नाम बदलने से इनकार किया
- 2024 में MBA में एडमिशन के समय आयशा ने नए नाम से सभी डॉक्यूमेंट्स जमा किए।
- लेकिन यूनिवर्सिटी ने रिकॉर्ड्स में नाम अपडेट करने से मना कर दिया।
- छात्रा का आरोप है कि मुस्लिम नाम होने के कारण उनसे बदसलूकी की गई।
- इस विवाद के चलते उनकी उपस्थिति कम हुई और वे एग्जाम नहीं दे सकीं।
- उनका एक पूरा साल बर्बाद हो गया।
छात्रा का कहना है कि उन्होंने शिक्षा मंत्रालय और UGC से भी शिकायत की, लेकिन यूनिवर्सिटी ने किसी मेल का जवाब नहीं दिया।
VC को कोर्ट में पेश होने का आदेश, छात्रा को मिला ₹1 लाख मुआवजा
मामला कोर्ट पहुंचने पर सुप्रीम कोर्ट ने एमिटी यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर को तलब किया।
VC ने माना कि छात्रा का नुकसान हुआ है और यूनिवर्सिटी ने उनकी फीस वापस की।
इसके बाद कोर्ट ने मुआवजे का आदेश दिया और यूनिवर्सिटी ने ₹1 लाख की भरपाई की।
अब मामला बन गया PIL—पूरी हायर एजुकेशन सिस्टम की होगी जांच
20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे केस को जनहित याचिका (PIL) में बदल दिया।
जस्टिस अमानुल्लाह और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा:
“यह सिर्फ एक छात्रा का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के पारदर्शिता और संचालन से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।”
अब सभी प्राइवेट, डीम्ड और नॉन-गवर्नमेंट यूनिवर्सिटीज के:
- गठन
- नियमन
- मान्यता
- फंडिंग
- नॉन-प्रॉफिट स्टेटस
का राष्ट्रीय स्तर पर ऑडिट होगा।
8 जनवरी को अगली सुनवाई, सभी एफिडेविट जमा करने का निर्देश
कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और UGC को आदेश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले सभी रिपोर्ट्स और एफिडेविट जमा किए जाएं।
यह फैसला भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।






