बांग्लादेश की राजनीति का एक युग समाप्त : पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का निधन
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संवाद 24 डेस्क। बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली और विवादास्पद शख्सियतों में शुमार Khaleda Zia का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वह लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं और राजधानी ढाका स्थित एवरकेयर हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंगलवार तड़के करीब छह बजे चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने आधिकारिक बयान में बताया कि सोमवार देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। बेहतर इलाज के लिए उन्हें लंदन ले जाने की तैयारी की जा रही थी और कतर से विशेष विमान भी स्टैंडबाय पर रखा गया था, लेकिन मेडिकल बोर्ड ने उन्हें अस्पताल से एयरपोर्ट ले जाने की अनुमति नहीं दी।
लंबी बीमारी से हार
डॉक्टरों के मुताबिक, खालिदा जिया उम्र से जुड़ी कई जटिल बीमारियों से पीड़ित थीं। उन्हें लिवर का एडवांस सिरोसिस, डायबिटीज, गठिया और हृदय व फेफड़ों से संबंधित गंभीर समस्याएं थीं। 23 नवंबर से वे अस्पताल में भर्ती थीं और 11 दिसंबर को उनकी हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। बीते कुछ दिनों से उनकी स्थिति ‘बेहद नाजुक’ बताई जा रही थी।
राजनीति में निर्णायक भूमिका
15 अगस्त 1945 को दीनाजपुर जिले में जन्मीं खालिदा जिया, बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी थीं। 1981 में पति की हत्या के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और Bangladesh Nationalist Party की कमान संभाली। वे देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और तीन बार—1991-1996, मार्च-जून 1996 तथा 2001-2006—प्रधानमंत्री पद पर रहीं।
उनका राजनीतिक सफर उपलब्धियों और विवादों दोनों से भरा रहा। आर्थिक सुधार, निजीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के प्रयासों के साथ-साथ उनकी सरकारों पर भ्रष्टाचार, उग्रवाद और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर आरोप भी लगे। उनकी सबसे तीखी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तत्कालीन व मौजूदा नेतृत्व से जुड़ी रही, खासकर Sheikh Hasina के साथ, जिसे बांग्लादेश की राजनीति की सबसे कड़वी प्रतिद्वंद्विताओं में गिना जाता है।
नजरबंदी, सजा और अस्थायी रिहाई
खालिदा जिया को 2018 में भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल की सजा सुनाई गई थी। बीएनपी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में उन्हें शर्तों के साथ अस्थायी रिहाई मिली, लेकिन इसके बाद भी उनकी सेहत लगातार बिगड़ती रही और उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया।
राजनीतिक संदर्भ में निधन
उनका निधन ऐसे समय हुआ है जब बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता और आगामी चुनावों की तैयारी के दौर से गुजर रहा है। उनके बेटे तारिक रहमान हाल ही में लंबे अंतराल के बाद देश लौटे हैं। खालिदा जिया के छोटे बेटे अराफात रहमान कोको का कुछ वर्ष पहले निधन हो चुका था।
बेगम खालिदा जिया के निधन के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति में एक प्रभावशाली अध्याय का अंत हो गया है। समर्थकों के लिए वह साहस और संघर्ष की प्रतीक रहीं, वहीं आलोचकों के लिए उनकी विरासत बहस का विषय बनी रहेगी। देश और विदेश से शोक संदेशों का सिलसिला जारी है।






