पाकिस्तान का रुख स्पष्ट : गाजा में शांति का समर्थन, लेकिन सैन्य कार्रवाई से दूरी
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संवाद 24 डेस्क। पाकिस्तान ने गाजा पट्टी में हमास के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने कहा है कि पाकिस्तानी सेना गाजा में हमास को निहत्था करने या उसके खिलाफ लड़ाई में हिस्सा नहीं लेगी। उनका यह बयान उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ने पाकिस्तान से गाजा में सेना तैनात करने का अनुरोध किया है।
अंतरराष्ट्रीय बल में भूमिका पर शर्त
इस्लामाबाद में साल के अंत की ब्रीफिंग के दौरान इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान गाजा में किसी अंतरराष्ट्रीय शांति सेना में योगदान देने पर विचार कर सकता है, लेकिन उसका जनादेश केवल “शांति स्थापना” तक सीमित होना चाहिए।
उन्होंने साफ कहा, “अगर यह कहा जाता है कि हमें जाकर लड़ना है, हमास को निहत्था करना है, उसके हथियार छीनने हैं या सुरंगें नष्ट करनी हैं—तो यह पाकिस्तान का काम नहीं है।”
नागरिक और सैन्य नेतृत्व में सहमति
डार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान के नागरिक और सैन्य नेतृत्व के बीच पूरी सहमति है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कभी भी “शांति लागू करने” जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि वह केवल शांति स्थापना की बात करता रहा है।
ISF और अमेरिकी योजना का संदर्भ
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका गाजा में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) के लिए सहयोगी देशों की तलाश कर रहा है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की गाजा शांति योजना के 20-सूत्रीय ढांचे का हिस्सा बताया जा रहा है। इसी संदर्भ में पाकिस्तान का नाम भी सामने आया था, जिस पर अब सरकार ने स्थिति साफ कर दी है।
धार्मिक नेताओं का दबाव
पाकिस्तान में इस मुद्दे पर धार्मिक संगठनों और मौलानाओं का दबाव भी सामने आया है। देश के प्रमुख इस्लामी विद्वानों के एक समूह ने सरकार को चेतावनी दी है कि वह गाजा में सेना भेजने के अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे न झुके। उनका कहना है कि मुस्लिम देशों को हमास को निहत्था करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
दो-राज्य समाधान पर जोर
इशाक डार ने दोहराया कि पाकिस्तान की आधिकारिक नीति फिलिस्तीन मुद्दे पर स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि गाजा की आंतरिक सुरक्षा फिलिस्तीनियों की जिम्मेदारी है और पाकिस्तान 1967 से पहले की सीमाओं पर आधारित स्वतंत्र दो-राज्य समाधान का समर्थन करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी अरब, जॉर्डन, मिस्र, यूएई, कतर और तुर्की जैसे देशों के प्रयासों से क्षेत्र में हिंसा कुछ हद तक कम हुई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब गाजा संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज है और कई देशों पर शांति व्यवस्था में भूमिका निभाने का दबाव बढ़ रहा है।






