“अल्पसंख्यकों को जिंदा जलाया जा रहा है” बांग्लादेश हिंसा पर शेख हसीना का बड़ा हमला, यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप

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संवाद 24 डेस्क। बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर देश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने अंतरिम सरकार पर तीखा हमला बोला है। भारत में निर्वासन के दौरान जारी अपने क्रिसमस संदेश में हसीना ने आरोप लगाया कि Muhammad Yunus के नेतृत्व वाली सरकार न केवल अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में विफल रही है, बल्कि उसकी मौन सहमति से “हिंदुओं को जिंदा जलाने जैसी अमानवीय घटनाएं” हो रही हैं।
शेख हसीना ने कहा कि मौजूदा सत्ता लोकतांत्रिक जनादेश से नहीं आई है और वह अवैध तरीके से हासिल की गई शक्ति का इस्तेमाल धार्मिक आधार पर उत्पीड़न के लिए कर रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बांग्लादेश के लोग इस “अंधेरे दौर” को ज्यादा समय तक स्वीकार नहीं करेंगे और यह शासन ज्यादा दिन नहीं टिकेगा।
एक हफ्ते में दो हिंदू युवकों की मॉब लिंचिंग
बीते एक सप्ताह में सामने आई दो बर्बर घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया है।
राजबाड़ी जिले के होसेनडांगा गांव में 29 वर्षीय अमृत मंडल की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, उस पर जबरन वसूली का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद भीड़ ने कानून को अपने हाथ में ले लिया।
इससे पहले 18 दिसंबर को ढाका के पास 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया। फैक्ट्री मजदूर दीपू पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया, जिसके बाद भीड़ ने उसे बेरहमी से पीटा और फिर उसके शव को पेड़ से बांधकर आग के हवाले कर दिया। यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
हिंसा के बीच सियासी संदेश
शेख हसीना ने अपने बयान में कहा कि धर्म के आधार पर नागरिकों को निशाना बनाना बांग्लादेश की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान शासन भय और अराजकता के सहारे सत्ता बचाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जनता अंततः इसका जवाब देगी।
संयुक्त राष्ट्र और दुनिया की चिंता
अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर United Nations ने भी चिंता जताई है। यूएन महासचिव António Guterres के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि संगठन बांग्लादेश की स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और सरकार से सभी धर्मों के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील करता है।
दीपू चंद्र दास की हत्या के बाद अमेरिका, भारत और कई अन्य देशों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की भूमिका और जिम्मेदारी पर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं।

Samvad 24 Office
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