बांग्लादेश चुनावी संग्राम : टूटता जमात का ‘किंगमेकर’ सपना, तारिक रहमान की वापसी से दोस्ती दुश्मनी में बदली
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संवाद 24 डेस्क। बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर बड़े उलटफेर के दौर में है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और Tarique Rahman की ढाका वापसी ने चुनावी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। जहां Bangladesh Nationalist Party (BNP) में उत्साह चरम पर है, वहीं Jamaat-e-Islami Bangladesh के लिए हालात तेजी से असहज होते जा रहे हैं।
बीएनपी की बढ़ती ताकत से घबराई जमात
इंटेलिजेंस आकलन के हवाले से सामने आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, फरवरी में संभावित चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी के भीतर बेचैनी बढ़ गई है। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि तारिक रहमान की सक्रिय राजनीति में वापसी के बाद बीएनपी बहुमत के साथ सरकार बना सकती है।
ऐसे में चुनाव के बाद ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाने का जमात का पुराना सपना टूट सकता है और वह किसी भी तरह की सौदेबाजी की स्थिति में नहीं रहेगी।
वोट शेयर का गणित बिगाड़ रहा है समीकरण
राजनीतिक आकलनों के अनुसार, तारिक रहमान की वापसी के बाद बीएनपी का राष्ट्रीय वोट शेयर 42–45 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसके उलट जमात-ए-इस्लामी का प्रभावी समर्थन आधार 8–10 प्रतिशत के बीच सिमटा हुआ है, जो मुख्य रूप से सिलहट और उत्तरी रंगपुर क्षेत्रों तक सीमित माना जाता है।
इस अंतर ने जमात को राष्ट्रीय राजनीति में हाशिए पर धकेलने का खतरा और गहरा कर दिया है।
सहयोगी से रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी
बीते वर्षों में अवामी लीग के खिलाफ बीएनपी के साथ मिलकर लड़ने वाली जमात अब तारिक रहमान को सहयोगी नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखने लगी है।
जमात के भीतर यह धारणा मजबूत हो रही है कि दक्षिणपंथी झुकाव वाले उसके पारंपरिक वोटर तेजी से बीएनपी के पक्ष में एकजुट हो रहे हैं, जिससे पार्टी का स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
मोहम्मद यूनुस पर भी नाराजगी
जमात के नेता अंतरिम सरकार के प्रमुख Muhammad Yunus से भी असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। उनका आरोप है कि यूनुस, तारिक रहमान के राजनीतिक पुनर्वास में अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रहे हैं।
जून महीने में लंदन में हुई यूनुस–तारिक मुलाकात को जमात इस पूरे घटनाक्रम का टर्निंग पॉइंट मानती है। उस बैठक के बाद चुनाव की समय-सीमा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली को लेकर दिए गए बयानों ने जमात की शंकाओं को और बढ़ा दिया।
विदेशी चर्चाओं पर आपत्ति
जमात ने चुनाव से जुड़े मुद्दों पर बांग्लादेश के बाहर, खासकर लंदन में हो रही बैठकों और चर्चाओं पर कड़ी नाराजगी जताई है।
पार्टी प्रमुख Shafiqur Rahman ने कथित तौर पर यह चिंता जाहिर की है कि विदेशी धरती पर हो रही राजनीतिक गतिविधियां देश के भीतर सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया में घरेलू राजनीतिक स्वामित्व को कमजोर करती हैं।
ढाका में जोरदार स्वागत से बढ़ी टेंशन
तारिक रहमान की ढाका वापसी पर हुए बड़े स्वागत और रैलियों ने जमात की बेचैनी को और बढ़ा दिया है। जमात नेताओं का आरोप है कि बीएनपी ने मोटरकेड, पोस्टर और जनसभाओं के जरिए चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया, जबकि दूसरी ओर जमात के पोस्टर और दीवारों पर लिखे नारे हटाए गए।
पार्टी के भीतर यह धारणा बन रही है कि अंतरिम प्रशासन खुलकर बीएनपी के पक्ष में झुका हुआ है, जो आने वाले चुनाव में जमात के लिए भारी साबित हो सकता है।
बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच बांग्लादेश की चुनावी जंग अब सिर्फ पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि पुराने सहयोगियों के बीच बढ़ती खाई की कहानी भी बनती जा रही






