अमेरिकी संसद में मोदी–पुतिन की तस्वीर पर सियासी बहस तेज
Share your love

डेमोक्रेट सांसद ने ट्रम्प की विदेश नीति को बताया नाकाम, भारत–अमेरिका संबंधों को ‘तुरंत सुधारने’ की जरूरत बताई
संवाद 24, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हालिया भारत दौरे की गूंज अमेरिका की संसद तक पहुंच गई है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की साउथ एंड सेंट्रल एशिया सबकमेटी की सुनवाई के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की ‘कार वाली सेल्फी’ चर्चा का केंद्र बन गई।
डेमोक्रेट प्रतिनिधि सिडनी कैमलेगर-डव ने यह तस्वीर दिखाते हुए कहा कि यह “हजार शब्दों के बराबर” है। इसके बहाने उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत नीति पर करारा हमला बोला। डव का आरोप था कि ट्रम्प प्रशासन की “दबाव वाली विदेश नीति” ने भारत को रूस के और करीब पहुंचाया, जबकि अमेरिका को रणनीतिक साझेदारी मजबूत करनी चाहिए थी।
“भारत को विरोधियों की ओर धकेला गया” – डव
सुनवाई के दौरान डव ने कहा कि ट्रम्प की नीतियों के कारण अमेरिका की भारत के साथ समझ बढ़ाने की क्षमता को नुकसान पहुंचा।
उनके शब्दों में—“जब कोई देश अपने सबसे अहम साझेदार को खुद से दूर कर दे, तो वह कोई पुरस्कार पाने का हकदार नहीं कहलाता।” यह टिप्पणी उन्होंने ट्रम्प के उन दावों पर तंज कसते हुए की, जिनमें वह खुद को नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य बताते रहे हैं।
डव ने यह भी कहा कि अमेरिका को “तेजी से कदम उठाकर” भारत के साथ साझेदारी को हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी, क्योंकि यह संबंध अमेरिकी सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता के लिए निर्णायक हैं।
रिपब्लिकन सांसद का जवाब: “भारत की चिंताओं को गंभीरता से लेना होगा”
डव की आलोचना के बीच रिपब्लिकन सांसद बिल हुइजेंगा ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के रुख का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा और उसका प्रॉक्सी संगठन TRF जिम्मेदार था, और ट्रम्प प्रशासन ने जुलाई 2025 में TRF को विदेशी आतंकी संगठन घोषित करके “सही कदम उठाया” था।
हुइजेंगा ने भारत–अमेरिका साझेदारी को “बेहद महत्वपूर्ण” बताते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों के बीच सहयोग मजबूत होना चाहिए।
पुतिन का भारत दौरा केंद्र में
4 दिसंबर को भारत पहुंचे राष्ट्रपति पुतिन ने औपचारिक कार्यक्रमों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कार में सफर किया था, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुई। यही फोटो अमेरिकी संसद की बहस में भी दिखाई गई।
पहलगाम हमला और TRF पर कार्रवाई
22 अप्रैल के पहलगाम हमले को 26/11 के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला माना गया। शुरुआत में TRF ने हमले की जिम्मेदारी ली थी, बाद में बयान वापस ले लिया। भारत ने इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के भीतर कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।
जुलाई 2025 में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने TRF को औपचारिक रूप से विदेशी आतंकी संगठन (FTO) और स्पेशली डिजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट (SDGT) घोषित किया था। भारत ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा था कि इससे दोनों देशों का आतंकवाद–रोधी सहयोग और मजबूत होगा।
इंडो-पैसिफिक सहयोग पर जोर
सुनवाई का मुख्य विषय था—‘अमेरिका–भारत रणनीतिक साझेदारी और एक स्वतंत्र व खुले इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा।’
डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ही सांसदों ने माना कि भारत–अमेरिका संबंध अमेरिका की वैश्विक रणनीति के लिए अहम हैं, हालांकि ट्रम्प प्रशासन की नीतियों पर दोनों की राय अलग दिखी।






