हॉन्गकॉन्ग में 77 साल की सबसे भीषण आग: 55 की मौत
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8 इमारतों का कॉम्प्लेक्स जलकर खाक; 279 लोग अब भी लापता, ठेकेदार समेत 3 गिरफ्तार
हॉन्गकॉन्ग के ताई पो जिले में बुधवार दोपहर एक विशाल रिहायशी कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लग गई, जिसे पिछले 77 वर्षों की सबसे बड़ी आग बताया जा रहा है। हादसे में अब तक 55 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 68 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। करीब 279 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
कॉम्प्लेक्स में 35-35 मंजिल वाली कुल आठ इमारतें थीं, जिनमें लगभग दो हजार फ्लैट थे। मरम्मत कार्य के चलते सभी टावर बांस की मचान से ढंके हुए थे, जिसने आग को तेजी से फैलने में मदद की।
चार इमारतों में लगी आग पर 10 घंटे बाद काबू पा लिया गया, जबकि तीन टावरों में 20 घंटे से ज्यादा समय बाद भी लपटें बुझ नहीं सकीं। पुलिस ने आग में लापरवाही की आशंका को लेकर ठेकेदार सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।


900 लोग घर छोड़कर शेल्टरों में पहुंचे
आग के बाद इलाके को खाली कराया गया और करीब 900 लोगों को क्वॉन्ग फुक कम्युनिटी हॉल और तुंग चेओंग स्ट्रीट लीजर बिल्डिंग में बनाए गए अस्थायी शेल्टरों में रखा गया। कई बुजुर्गों के समय पर बाहर नहीं निकल पाने के कारण घायलों की संख्या बढ़ी है।
दर्जनों मंजिलों पर तापमान इतना बढ़ा कि फायर फाइटर नहीं पहुंच पाए
लपटें इतनी तेज थीं कि कई मंजिलों पर तापमान असहनीय हो गया। आग बुझाने के दौरान एक दमकलकर्मी की भी मौत हो गई। तेज हवा और जलते मलबे के कारण आग एक इमारत से दूसरी में फैलती गई।
राजनीतिक गतिविधियां रोकी गईं, चुनाव स्थगित करने पर विचार
7 दिसंबर को होने वाले चुनाव से पहले सभी प्रचार गतिविधियां रोक दी गई हैं। हॉन्गकॉन्ग के चीफ एग्जिक्यूटिव जॉन ली ने चुनाव स्थगित करने की संभावना जताई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोक, कंपनियों ने मदद का हाथ बढ़ाया
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जापान, जर्मनी, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका सहित कई देशों ने हादसे पर शोक व्यक्त किया है। मैकडॉनाल्ड्स ने पीड़ितों को 1000 फूड पैकेट देने की घोषणा की है।
पिछले 7 दशक की बड़ी आगें
- 1948: पांच मंजिला गोदाम में विस्फोट, 176 की मौत
- 1962: शुई पो में आग, 44 लोगों की मौत
- 1996: कोवलून की गार्ले बिल्डिंग में आग, 41 की मौत






