ईरान का बड़ा बयान: “हम पर हमला रुका तो तुरंत रुकेंगे जवाबी हमले”, तनाव के बीच शांति के संकेत

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संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान की ओर से एक बड़ा और अहम बयान सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट कहा है कि यदि ईरान पर हमले बंद हो जाते हैं, तो उसकी सेना भी तुरंत अपने जवाबी सैन्य अभियान रोक देगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव चरम पर पहुंच चुका है और पूरी दुनिया इस संघर्ष पर नजर बनाए हुए है। ईरान के इस रुख को कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, हाल के दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा किए गए हमलों के जवाब में ईरान लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा था। लेकिन अब पहली बार तेहरान की ओर से यह साफ संदेश दिया गया है कि अगर उस पर हमला नहीं होगा, तो वह भी शांति का रास्ता अपनाने को तैयार है।

शर्तों के साथ शांति की पेशकश
ईरान ने यह भी साफ किया है कि वह केवल अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी शांति चाहता है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी समझौते के लिए जरूरी है कि भविष्य में हमलों की कोई पुनरावृत्ति न हो और सुरक्षा की गारंटी दी जाए। यानी साफ है कि ईरान केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान की दिशा में बातचीत चाहता है।

संघर्ष के बीच नरमी के संकेत
हालांकि जमीनी स्तर पर हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। खाड़ी क्षेत्र में कई जगहों पर हमले और जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं। इससे यह साफ होता है कि स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। इसके बावजूद, यह बयान इस बात का संकेत देता है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है और आने वाले दिनों में तनाव कम हो सकता है।

सीजफायर की दिशा में बढ़ते कदम
इससे पहले अमेरिका की ओर से भी हमले रोकने के संकेत दिए गए थे और दो सप्ताह के लिए बमबारी स्थगित करने की बात सामने आई थी। इसी कड़ी में ईरान का यह बयान दोनों देशों के बीच संभावित युद्धविराम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वैश्विक असर पर सबकी नजर
मध्य-पूर्व में यह संघर्ष सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल लेते हैं, तो इससे न केवल युद्ध टल सकता है, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी स्थिरता लौट सकती है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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