ईरान युद्ध पर बड़ा दबाव: चीन-रूस ने अमेरिका और इज़रायल को दी कड़ी चेतावनी

संवाद 24 नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच चीन और रूस ने अमेरिका और इज़रायल से ईरान पर जारी सैन्य हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है। दोनों देशों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष नहीं रुका, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

चीन की चेतावनी – ‘युद्ध बन सकता है खतरनाक चक्र’
चीन ने साफ कहा है कि लगातार सैन्य कार्रवाई से हालात “खतरनाक चक्र” में बदल सकते हैं। चीन के विशेष दूत और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने अमेरिका और इज़रायल को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जो इस संघर्ष की शुरुआत करता है, उसी को इसे खत्म करने की पहल करनी चाहिए। चीन ने यह भी चेताया कि यदि हालात नहीं सुधरे तो पूरा क्षेत्र अस्थिर हो सकता है और वैश्विक व्यापार पर इसका असर पड़ेगा। खासतौर पर तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर इसका दबाव बढ़ सकता है।

रूस भी सख्त – हमले रोकने की मांग
रूस ने भी अमेरिका और इज़रायल के हमलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे खतरनाक बताया है। मॉस्को ने कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है बल्कि इससे बड़े स्तर पर संघर्ष भड़क सकता है। रूस पहले भी ईरान के परमाणु ठिकानों के पास हुए हमलों की आलोचना कर चुका है और इसे “गंभीर जोखिम” बताया था।

जंग की बढ़ती आग – क्या हो रहा है मैदान में?
फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह संघर्ष अब लगातार तेज होता जा रहा है। अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान भी लगातार पलटवार कर रहा है।
हाल के दिनों में इज़रायल द्वारा तेहरान में बड़े हमले किए गए, जबकि अमेरिका ने कुछ हमलों पर अस्थायी रोक लगाकर बातचीत की कोशिश की है।

तेल और अर्थव्यवस्था पर खतरा
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, और यहां किसी भी तरह की बाधा से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ सकती है। चीन और रूस दोनों ने इसी खतरे को देखते हुए चेताया है कि अगर युद्ध लंबा चला तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ेगा।

कूटनीति बनाम युद्ध – क्या है आगे का रास्ता?
चीन और रूस लगातार कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं। उनका कहना है कि बातचीत और समझौते के जरिए ही इस संकट का हल निकाला जा सकता है। हालांकि, जमीनी स्थिति को देखते हुए यह आसान नहीं लग रहा है। एक तरफ हमले जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत की कोशिशें भी चल रही हैं।

दुनिया की नजर इस संघर्ष पर
यह संघर्ष अब सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का हिस्सा बन चुका है। चीन और रूस की सक्रियता यह दिखाती है कि आने वाले समय में यह टकराव और बड़ा रूप ले सकता है। ईरान पर हमलों को लेकर चीन और रूस की यह अपील साफ संकेत देती है कि दुनिया के बड़े देश इस युद्ध को लेकर चिंतित हैं। अगर समय रहते हालात नहीं संभाले गए, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है – चाहे वह तेल की कीमतें हों, अर्थव्यवस्था हो या वैश्विक शांति।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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