खाड़ी संकट पर भारत-रूस की बड़ी रणनीतिक बातचीत: क्या INSTC बनेगा नया गेमचेंजर
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संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय वर्चुअल बातचीत हुई है, जिसमें खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और उसके भारत के व्यापारिक हितों पर पड़ने वाले प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक का मुख्य फोकस अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) और उससे जुड़े व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और निरंतरता सुनिश्चित करना रहा।
खाड़ी संकट पर गहरी चिंता
सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता जताई। हालात ऐसे हैं कि समुद्री मार्गों और खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम रास्तों पर जोखिम बढ़ गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की बड़ी ऊर्जा जरूरतें इसी क्षेत्र से पूरी होती हैं।
INSTC पर बढ़ा फोकस
बैठक में सबसे ज्यादा जोर INSTC (International North-South Transport Corridor) को मजबूत करने पर दिया गया। यह कॉरिडोर भारत को ईरान के रास्ते रूस और यूरोप से जोड़ता है और पारंपरिक समुद्री रास्तों की तुलना में तेज और सस्ता विकल्प माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो INSTC भारत के लिए एक सुरक्षित और वैकल्पिक व्यापारिक मार्ग बन सकता है।
चाबहार पोर्ट की अहम भूमिका
इस बातचीत में ईरान के चाबहार पोर्ट का भी खास जिक्र हुआ, जो INSTC का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बंदरगाह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का रणनीतिक रास्ता देता है। भारत पहले से ही इस प्रोजेक्ट में निवेश कर रहा है और इसे अपने लॉजिस्टिक नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।
ऊर्जा और व्यापार पर असर
भारत और रूस के बीच चर्चा में ऊर्जा सुरक्षा भी अहम मुद्दा रहा। रूस पहले ही भारत के प्रमुख तेल सप्लायर्स में शामिल है और दोनों देश इस सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमत हैं। पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, ऐसे में रूस के साथ साझेदारी भारत के लिए महत्वपूर्ण बन जाती है।
रणनीतिक साझेदारी का संकेत
इस वर्चुअल बैठक को भारत और रूस के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है। दोनों देश न केवल व्यापार और ऊर्जा, बल्कि लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह साझेदारी भारत को वैश्विक स्तर पर अधिक रणनीतिक स्वतंत्रता देती है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक संकटों से जूझ रही है।
आगे क्या?
अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो भारत को वैकल्पिक व्यापार मार्गों और ऊर्जा स्रोतों पर अधिक निर्भर होना पड़ेगा। ऐसे में INSTC और रूस के साथ सहयोग भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए अहम साबित हो सकता है। फिलहाल, भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए बहु-आयामी रणनीति पर काम कर रही है।






