होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान को घेरने के लिए ट्रंप ने कसी कमर, बना रहे ‘महागठबंधन’
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संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति के पटल से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान के साथ बढ़ते बेहद तनावपूर्ण रिश्तों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे मास्टरस्ट्रोक की तैयारी कर ली है, जो मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) की पूरी तस्वीर बदल सकता है। ट्रंप इसी हफ्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) की सुरक्षा के लिए एक विशाल अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन की घोषणा करने वाले हैं। यह कदम न केवल ईरान की घेराबंदी करेगा, बल्कि दुनिया की तेल सप्लाई लाइन पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की अमेरिका की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
दुनिया की ‘लाइफलाइन’ पर पहरा: क्या है ट्रंप का प्लान?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह रणनीतिक रास्ता है जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ईरान ने हाल के दिनों में अपनी समुद्री ताकत और माइंस का इस्तेमाल कर इस रास्ते को लगभग ठप कर दिया है। इसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेंगे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, व्हाइट हाउस इसी सप्ताह एक नए सुरक्षा मिशन का एलान करेगा। इस मिशन के तहत अमेरिकी नौसेना उन कमर्शियल जहाजों को सुरक्षा कवच प्रदान करेगी, जिन्हें ईरान की ओर से खतरे की आशंका है।
नाटो (NATO) को चेतावनी: ‘साथ आओ वरना अंजाम भुगतो’
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर अपने सहयोगियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा है कि अगर नाटो देश होर्मुज के रास्ते को खोलने और सुरक्षा में अमेरिका का साथ नहीं देते हैं, तो गठबंधन का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। ट्रंप ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को सुरक्षित रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजें। उनका तर्क है कि जिन देशों को यहाँ से तेल मिलता है, सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होनी चाहिए।
ईरान की घेराबंदी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
ईरान ने पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, जिससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का डर बना हुआ है। अगर यह अंतरराष्ट्रीय गठबंधन जमीन पर उतरता है, तो यह ईरान के लिए एक बड़ा सैन्य दबाव होगा। ट्रंप का यह रुख दिखाता है कि वे ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत अपने सहयोगियों पर भी रक्षा खर्च और जिम्मेदारी साझा करने का दबाव बना रहे हैं।
क्या युद्ध की ओर बढ़ रही है दुनिया?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह घोषणा ईरान को उकसा सकती है। यदि अमेरिकी गठबंधन के युद्धपोत ईरान के तट के इतने करीब तैनात होते हैं, तो एक छोटी सी गलती भी बड़े युद्ध की चिंगारी भड़का सकती है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए है ताकि दुनिया की अर्थव्यवस्था को तेल संकट से बचाया जा सके। अब पूरी दुनिया की निगाहें व्हाइट हाउस की उस आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो समुद्री व्यापार की नई इबारत लिख सकती है। क्या ट्रंप इस अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को हकीकत में बदल पाएंगे या फिर सहयोगी देश इस ‘आग के खेल’ से खुद को दूर रखेंगे? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।






