ग्लोबल ऑयल मार्केट में भारत का दबदबा: अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल के आयात को दी हरी झंडी

Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में छिड़े भीषण संघर्ष और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। कल तक जो अमेरिका भारत पर रूस से तेल न खरीदने का दबाव बना रहा था और भारी टैरिफ (Tariff) की धमकियां दे रहा था, उसी अमेरिका ने अब अचानक अपने सुर बदल लिए हैं। जो बाइडन के बाद अब ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिकी वित्त विभाग ने भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की ‘आपातकालीन छूट’ (Waiver) दे दी है।

आखिर क्यों पलटा अमेरिका?
सूत्रों के अनुसार, मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है। विशेष रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz), जहाँ से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, वहां आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है। ऐसे में यदि खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई रुकती है, तो भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि वैश्विक बाजार में तेल के प्रवाह को बनाए रखने के लिए यह 30 दिनों की अस्थायी छूट दी जा रही है। उन्होंने भारत को अमेरिका का एक ‘अपरिहार्य भागीदार’ (Essential Partner) बताया है। हालांकि, अमेरिका ने यह भी साफ किया है कि यह छूट केवल उस तेल के लिए है जो वर्तमान में समुद्र में टैंकरों में फंसा हुआ है।

भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की जीत
भारत शुरू से ही अपनी ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ (Energy Security) को लेकर अडिग रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कई मौकों पर स्पष्ट किया है कि 140 करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा करना भारत की पहली प्राथमिकता है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका की यह ‘छूट’ वास्तव में उसकी मजबूरी है। यदि भारत को रूसी तेल से पूरी तरह रोक दिया जाता, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कमी हो जाती, जिससे खुद अमेरिका में महंगाई का विस्फोट हो सकता था।

क्या है 30 दिन का गणित?
यह छूट 3 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। अमेरिका का तर्क है कि इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा क्योंकि यह तेल पहले से ही समुद्र में है। लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी यह है कि अमेरिका चाहता है कि इस दौरान भारत अपनी निर्भरता रूस से हटाकर अमेरिकी तेल पर बढ़ाए। ट्रंप प्रशासन पहले ही भारत पर दबाव बना चुका है कि वह रूस से तेल की खरीद कम करे और बदले में अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाए, जिसके बदले भारत पर लगने वाले टैरिफ में कटौती की गई है।

रूस ने भी दिया भारत का साथ
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मॉस्को ने भी भारत को भरोसा दिलाया है कि वह किसी भी संकट की स्थिति में भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है। क्रेमलिन के प्रवक्ता ने साफ कहा है कि भारत अपनी मर्जी से किसी भी सप्लायर से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। वर्तमान में भारत के पास लगभग 25 दिनों का कच्चा तेल और कुल मिलाकर 8 हफ्तों का पेट्रोलियम भंडार मौजूद है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए काफी है।

भारत के लिए राहत की खबर
भले ही यह छूट केवल 30 दिनों के लिए हो, लेकिन इसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती ताकत को एक बार फिर साबित कर दिया है। ईरान संकट के कारण दुनिया जिस ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है, उसमें भारत ने अपनी चतुराई भरी कूटनीति से न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित किया है, बल्कि अमेरिका जैसे महाशक्ति को भी अपने फैसले बदलने पर मजबूर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह 30 दिनों की अवधि और बढ़ाई जाती है या भारत वैकल्पिक रास्तों से अपनी तेल की प्यास बुझाता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News